Education System

  • बिहार की शिक्षा व्यवस्था का हाल

    इस साल मेडिकल में दाखिले की नीट यूजी की परीक्षा के नतीजे आए तो यह खबर चारों तरफ प्रमुखता से छपी कि शीर्ष एक सौ छात्रों में सबसे ज्यादा राजस्थान के हैं। इसके साथ ही यह भी खबर थी बिहार और झारखंड से किसी छात्र को शीर्ष सौ में जगह नही मिली। सोचें, बिहार से पिछली बार सात छात्रों को सौ फीसदी अंक मिले थे। लेकिन इस बार किसी को नहीं मिला। एक तो यह खबर है। लेकिन इसके साथ ही सभी अखबारों में अगल बगल में ही यह भी खबर लगी है कि नीट यूजी की ऑल इंडिया चौथी...

  • जहां ऐसे स्कूल हों!

    education system: वर्ष 2023-24 के शैक्षणिक सत्र में देश में करीब 13 हजार ऐसे स्कूल थे, जहां एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया, जबकि उन स्कूलों में करीब 32 हजार शिक्षक थे। दूसरी तरफ ऐसे स्कूल भी हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक है। also reads: देश के बनावटी इतिहास लेखन की संघ की कोशिश… ‘विकसित भारत’ बनाने के जारी उद्घोष के बीच ये खबर अहम है कि 2023-24 के शैक्षणिक सत्र में देश में करीब 13 हजार ऐसे स्कूल थे, जहां एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया, जबकि उन स्कूलों में करीब 32 हजार शिक्षक थे। इनमें से करीब...

  • ऐसी शिक्षा किस काम की जिससे रोजगार नहीं!

    पिछले 25 वर्षों में सरकार की उदार नीति के कारण देशभर में तकनीकि शिक्षा व उच्च शिक्षा देने के लाखों संस्थान छोटे-छोटे कस्बों तक में कुकरमुत्ते की तरह उग आए है। जिनकी स्थापना करने वालों में या तो बिल्डर्स थे या भ्रष्ट राजनेता। जिन्होंने शिक्षा को व्यवसाय बनाकर अपने काले धन को इन संस्थानों की स्थापना में निवेश किया। डिग्रियां हासिल करवाई। नाकारा डिग्रियां से रोजगार का संकट बना। आए दिन देश में चपरासी की नौकरी के लिए लाखों ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट, बी.टेक व एमबीए जैसी डिग्री धारकों के आवेदन की खबरें अख़बारों में पढ़ने में मिलती है। ऐसी हृदय...

  • कमजोर हो रही जड़ें

    विश्व में भारत की आज जितनी भी हैसियत है, उसे बनाने में भारत के इंजीनियरों एवं टेक कर्मियों की भूमिका अहम रही है। इसीलिए यह चिंता का पहलू है कि भारत में ये जड़ें मजबूत होने के बजाय, कमजोर हो रही हैं। किसी देश का भविष्य कैसा है, इसका अंदाजा लगाने का एक पैमाना यह है कि वहां साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित की शिक्षा का क्या हाल है। इन डिग्रियों को हासिल करने को लेकर समाज में कितना आकर्षण है और इन डिग्रीधारियों के लिए कैसे अवसर उपलब्ध हैं, ये दोनों महत्त्वपूर्ण पहलू हैं। विश्व में भारत की आज...

  • हानिकारक है दिमाग नियंत्रण

    रिपोर्ट शैक्षिक स्वतंत्रता के बारे में है, इसलिए संभवतः इसकी भारत में ज्यादा चर्चा नहीं होगी। रिपोर्ट चर्चित हो, तो सरकार उसे ठुकरा देगी। सत्ता पक्ष का जवाब आएगा कि यह पूर्वाग्रह से ग्रस्त रिपोर्ट है। ये सब आज के दौर में अपेक्षित प्रतिक्रियाएं हैं। जिन समाजों में आविष्कार होते हैं और जिनकी निगाह भविष्य पर टिकी होती है, वहां दिमागी आजादी पर सीमाएं लगाने की कोशिश सामान्यतः नहीं होती। बल्कि यह मान्यता प्रचलित है कि दिमागी नियंत्रण से बेहतर है, दिमागी नटखटपन को सहना। जबकि एक ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि पिछले दस साल में भारत में...