Fadnavis

  • फड़नवीस क्या उद्धव के संकटमोचन बनेंगे

    वैसे तो पूरे देश की ही राजनीति दिलचस्प हो गई है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि भाजपा के अंदर का भितरघात खुल कर दिखने लगा है। नेताओं की महत्वाकांक्षाएं आपस में टकराने लगी हैं, जिससे अंदर की खबरें बाहर जा रही हैं और किसी न किसी की शह से अखबारों में खबरें छप भी रही हैं। सोशल मीडिया में भी कई ऐसे मुद्दों पर बहस हो रही है और मुद्दे वायरल हो रहे हैं, जिनको पहले दबा दिया जाता था या काउंटर नैरेटिव के जरिए कमजोर किया जाता था। लेकिन पूरे देश में जिस राज्य की राजनीति सबसे...

  • संसदीय बोर्ड में फड़नवीस या योगी?

    भारतीय जनता पार्टी में फैसला करने वाली सबसे बड़ी बॉडी संसदीय बोर्ड है। हालांकि सबको पता है कि चाहे कांग्रेस की सीडब्लुसी हो या भाजपा का संसदीय बोर्ड, फैसला ऊपर से दो या तीन लोगों को ही करना होता है। फिर भी भाजपा के संसदीय बोर्ड का सदस्य होना एक समय बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। पार्टी के सबसे बड़े नेता ही इसके सदस्य होते थे। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को इसमें रखा जाता था। हालांकि नितिन गडकरी को इसमें से हटा दिया गया है। अभी 12 सदस्य हैं, जिनमें राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और संगठन महामंत्री पदेन सदस्य के तौर...

  • फड़नवीस पर शरद पवार का निशाना

    पुणे। एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़ड़नवीस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की बातचीत में वे शामिल नहीं थे। इसलिए उन्हें इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। शरद पवार ने दावा किया कि उनकी पार्टी के नेता जयंत पाटिल और उनके भतीजे व एनसीपी प्रमुख अजित पवार विलय की बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने पिछले दिनों कहा था कि अगर एनसीपी के विलय की बातचीत सच में चल रही होती, तो अजित पवार ने उनके साथ यह...

  • फड़नवीस का कद और बढ़ा

    करीब 11 साल पहले 2014 के अंत में जब देवेंद्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि मराठा वर्चस्व वाले इस प्रदेश में एक ब्राह्मण नेता इतना शक्तिशाली हो जाएगा। 2019 में शिव सेना से तालमेल टूटने और उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद आमतौर पर यह धारणा थी कि अब भाजपा के लिए मुश्किल होगी और फड़नवीस के लिए तो और ज्यादा मुश्किल होगी। उसी समय फड़नवीस ने यह शेर कहा था, पानी उतरता देख कर किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समंदर...

  • हिंदी पर कदम पीछे?

    इन हाल के वर्षों में ऐसा क्या बदल गया है? राजनीतिक नेतृत्व- खासकर केंद्र में सत्ताधारी दल को इस पर आत्म-निरीक्षण करना चाहिए? संकेत साफ है। हिंदी को राजनीति का औजार बनाने से इस भाषा का नुकसान ही हो रहा है। महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई अनिवार्य बनाने के बाद इसकी अनिवार्यता ना होने संबंधी अब दिए गए मुख्यमंत्री के बयान का सीधा मतलब इस मुद्दे पर कदम वापसी है। नई शिक्षा नीति के प्रावधान के मुताबिक इस बारे में राज्य सरकार के फैसले पर राज्य में व्यापक विरोध भड़का। लगभग सभी राजनीतिक दलों के अंदर से इसके...