भारतीय जनता पार्टी में फैसला करने वाली सबसे बड़ी बॉडी संसदीय बोर्ड है। हालांकि सबको पता है कि चाहे कांग्रेस की सीडब्लुसी हो या भाजपा का संसदीय बोर्ड, फैसला ऊपर से दो या तीन लोगों को ही करना होता है। फिर भी भाजपा के संसदीय बोर्ड का सदस्य होना एक समय बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। पार्टी के सबसे बड़े नेता ही इसके सदस्य होते थे। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को इसमें रखा जाता था। हालांकि नितिन गडकरी को इसमें से हटा दिया गया है। अभी 12 सदस्य हैं, जिनमें राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और संगठन महामंत्री पदेन सदस्य के तौर पर हैं। इनके अलावा राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा पूर्व अध्यक्ष के तौर पर हैं। बाकी लोगों में एक बीएस येदियुरप्पा और सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद वहां सांत्वना के तौर पर एडजस्ट किया गया था। लेकिन अन्य चार लोगों को पता नहीं था कि उनको क्यों संसदीय बोर्ड में रखा गया है।
इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, के लक्ष्मण और सत्यनारायण जटिया को भी संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था। अब कहा जा रहा है कि 12 सदस्यों की इस बॉडी से कई लोगों को हटाया जा सकता है और नए चेहरे लाए जा सकते हैं। नए चेहरों में सबसे ज्यादा नजर देवेंद्र फड़नवीस और योगी आदित्यनाथ पर होगी। ध्यान रहे अभी 16 राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री हैं लेकिन किसी को इसमें नहीं रखा गया है। एक समय मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह चौहान संसदीय बोर्ड के सदस्य होते थे। अगर देवेंद्र फड़नवीस को संसदीय बोर्ड में जगह मिलती है तो यह मैसेज जाएगा कि वे योगी आदित्यनाथ से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। ध्यान रहे अभी उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। सो, योगी या फड़नवीस या दोनों की अटकलें लगाई जा रही हैं। वैसे फड़नवीस अभी केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य हैं। केंद्रीय चुनाव समिति में संसदीय बोर्ड के 12 सदस्यों के अलावा सिर्फ फड़नवीस, भूपेंद्र यादव और महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनाथी श्रीनिवासन ही सदस्य हैं।
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