तमिलनाडु में विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद सभी पार्टियों के अंदर किसी न किसी तरह का विवाद और परेशानी चल रही है। कांग्रेस ने डीएमके को छोड़ा तो अन्ना डीएमके में फूट हो गई। उसके आधा दर्जन विधायकों ने इस्तीफा दिया हुआ है। एक समय तो 20 के करीब विधायक अलग हो गए थे। हालांकि बाद में सब वापस लौटे। फिर भी इन विधायकों का नेतृत्व करने वाले नेताओं ने पार्टी की एकजुटता के लिए एक शर्त रख दी है। शर्त ऐसी है, जिसे स्वीकार करने पर पार्टी के महासचिव ई पलानीस्वामी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
नाराज विधायकों का नेतृत्व कर रहे सीवी षणमुगम और वेलुमनि ने शर्त रखी है कि पार्टी कि दिवंगत नेता जयललिता की सहेली वीके शशिकला को पार्टी में शामिल करना होगा। उनके साथ साथ उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण को भी पार्टी में लेना होगा। गौरतलब है कि दिनाकरण और शशिकला दोनों ने अलग पार्टी बनाई है। इन दोनों का एक समय पार्टी में बड़ा असर रहा है और ये पार्टी के थेवर वोट आधार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनके पार्टी में लौटने से पलानीस्वामी की स्थिति कमजोर होगी। इनके साथ मिल कर दूसरा खेमा पार्टी पर नियंत्रण बनाने की कोशिश करेगा। हालांकि पलानीस्वामी के लिए अच्छी बात यह है कि ओ पनीरसेल्वम को लौटाने की बात नहीं हो रही है। वे चुनाव से पहले डीएमके से जुड़ गए थे।
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