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झारखंड की अनिश्चितता से किसको फायदा?

मुख्यमंत्री की विधानसभा सदस्यता पर अयोग्यता की तलवार लटकी है। लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी है लेकिन राज्यपाल इस पर फैसला नहीं कर रहे हैं।

हेमंत को जीवनदान या उनकी अपनी रणनीति?

अवसरवादी आदमी की परिभाषा यह होती है कि वह पानी में गिर जाए तो उसी में नहाने लगे। इसके लिए यह भी कहा जाता है कि फिसल गए तो हर हर गंगे!

झारखंड कांग्रेस की पालकी ढोने की मजबूरी

कांग्रेस के 16 जीते हुए विधायक हैं और दो विधायक बाबूलाल मरांडी की पार्टी छोड़ कर आए थे, जिनमें से एक बंधु तिर्की की सदस्यता खत्म हो गई है।

झारखंड में जैसे को तैसा की राजनीति चलेगी

झारखंड में सत्तारूढ़ पार्टी और मुख्य विपक्षी पार्टी की राजनीति एक दूसरे से बदला लेना यानी जैसे को तैसा वाले रास्ते पर चलती दिख रही है।

झारखंड में क्या फिर अस्थिरता फैलेगी?

सीबीआई ने जो सामग्री जुटाई है उसके आधार पर कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री सहित उनके परिवार के कई सदस्यों पर नियमित मुकदमा दर्ज हो सकता है।

सरयू राय का जवाब नहीं!

झारखंड से अपना कुछ लेना-देना नहीं रहा है। बस इस चुनाव में अपने को जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा चुनाव के परिणामों की प्रतीक्षा थी। वजह यह थी कि यहां से भाजपा से टिकट न दिए जाने पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता सरयू राय ने निवर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप चुनाव लड़कर उन्हें बुरी तरह से हराया। सच कहा जाए कि आज वहां भाजपा की हार का श्रेय कोई भी ले। मगर इसकी बड़ी वजह रघुवर दास ही रहे है। मतदान से काफी पहले ही अखबारों में छपने लगा था कि मुख्यमंत्री रघुवर दास बुरी तरह से हार रहे हैं। हालांकि उनके अपने काम-काज व उनके मनमाने व कठोर बर्ताव के कारण वैसे भी जनता उनसे नाराज थी। रही-सही कमी उनकी जाति व नरेंद्र मोदी व अमित शाह के घमंड ने पूरी कर दी। सरयू राय ने उन्हे उस सीट से हराया जहा मुख्यमंत्री लगातार पांच बार जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। पहले तो मुझे लगता था कि सरयू राय जाति से ब्राह्मण होंगे क्योंकि उन्होंने बिहार से चाणक्य की तरह से अपने विरोधी का सूपड़ा साफ किया। मगर बाद में पता चला कि वे तो बक्सर के राजपूत हैं। सच कहा जाए तो सरयू राय… Continue reading सरयू राय का जवाब नहीं!

क्यों बदल गया सियासी माहौल?

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी की करारी हार हुई। यहां तक कि मुख्यमंत्री रघुबर दास तक को भी हार का मुंह देखना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे स्टार प्रचारकों की कई रैलियों के बावजूद भाजपा हार गई। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 37 सीटों मिली थी, जबकि इस बार वह सिर्फ 25 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय जनता दल का गठबंधन सत्ता में आ गया है। जेएमएम के नेता हेमंत सोरेन फिर एक बार राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे। 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा ने झारखंड में धूमधाम से सरकार बनाई थी। 2019 के लोकसभा चुनावों में राज्य की पांच में से तीन सीटें जीतने के साथ पार्टी ने 50 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। लेकिन ताजा नतीजों ने राज्य की सत्ता से उसकी विदाई कर दी है। तो चंद महीनों में राज्य की जतना ने अपना मन क्यों बदल लिया? जानकारों के मुताबिक भाजपा की इस हार के पीछे मूल कारण है देश के ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों में असंतोष। उसकी वजह आर्थिक मंदी और नौकरियों की कमी है। अब लोगों को लगता है कि सरकार ने ऐसा कुछ नहीं… Continue reading क्यों बदल गया सियासी माहौल?

भाय-भाय, क्यों करें हाय-हाय ?

झारखंड में भाजपा की हार से यदि यह भाय-भाय पार्टी कोई सबक नहीं लेगी तो अब इसे हाय-हाय करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। हिंदी इलाके में जन्मी, पली, बढ़ी भाजपा पार्टी (भाय-भाय पार्टी) का अब हिंदी इलाके से ही सूंपड़ा साफ होने लगा है। 2019 के संसदीय चुनाव में भाजपा को प्रचंड विजय मिली थी। लेकिन मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरयाणा, महाराष्ट्र और अब झारखंड में इतनी जल्दी भाजपा का क्षरण किस बात का सूचक है ? हरयाणा में यदि चौटाला-पार्टी का टेका नहीं मिलता तो वहां से भी भाजपा गई थी। सिर्फ उत्तरप्रदेश और गुजरात-जैसे बड़े प्रांतों में भाजपा अपने दम पर टिकी हुई है। कर्नाटक में भी किसी तरह गाड़ी धक रही है। यदि इन प्रांतों में भी आज चुनाव हो जाएं तो क्या होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। अकेले झारखंड में भाजपा की हार के जो छह-सात कारण हैं, वे सब आप टीवी पर सुन चुके हैं और अखबारों में पढ़ चुके हैं। उनके बारे में मुझे यहां कुछ नहीं कहना है। मैं तो इससे भी ज्यादा बुनियादी सवाल कर रहा हूं। सारे देश में भाजपा से हो रहे इस मोहभंग का कारण क्या है ? भारत की जनता नौटंकियों से तंग आ चुकी है।… Continue reading भाय-भाय, क्यों करें हाय-हाय ?

झारखंड में बड़ा झटका

झारखंड के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जोरदार झटका लगा है। हरियाणा और महाराष्ट्र विधान सभा चुनावों से इसे जोड़ कर देखें, तो इस सवाल पर अब ये चर्चा शुरू होगी कि क्या भाजपा का अपना खास एजेंडा अब लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है? उन दो चुनावों के पहले केंद्र की भाजपा सरकार धारा कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाली संविधान की धारा 370 को खत्म कर चुकी थी। झारखंड चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या विवाद पर फैसला आ चुका था और साथ ही सरकार नागरिकता संशोधन कानून भी पारित करा चुकी थी। चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार चार महीनों में अयोध्या में भव्य मंदिर बनाने की बात की। प्रधानमंत्री ने ये टिप्पणी भी कर डाली कि नए नागरिकता कानून और एनआरसी का विरोध पहनने वालों की पहचान उनके कपड़ों से की जा सकती है। यानी उनका इशारा मुसलमानों की तरफ था। इसके बावजूद झारखंड में अपेक्षित नतीजे भाजपा को हासिल नहीं हुए। बहरहाल, भाजपा इस पर संतोष कर सकती है कि उनका मुख्य वोट आधार उसके साथ मजबूती से बना हुआ है। ताजा नतीजे भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि देश में (जहां भाजपा मुख्य… Continue reading झारखंड में बड़ा झटका

काले का श्राप व अहंकार को थप्पड़!

अमरप्रीत सिंह काले को सलाम! कौन है सरदार काले? क्यों उसकी वाह मेरी कलम से? इसलिए कि मैंने काले से कहा था कि यदि तुम जैसे कह रहे हो वैसे रघुवर दास जमशेदपुर से सचमुच हारे तो मैं लिखूंगा कि चींटी ही बहुत है अहंकार तोड़ने के लिए! हां, झारखंड का फैसला कांग्रेस-जेएमएम की जीत नहीं है, बल्कि अहंकार के खिलाफ जनता की, भाजपा के कार्यकर्ताओं की बगावत है। जनता ने भाजपा को महाराष्ट्र में जैसे पटकी दी, हरियाणा में उसे जैसे चौटाला का मोहताज बनाया वैसे ही झारखंड में जनता ने सिरे से हराया तो अहंकार के खिलाफ गुस्से के चलते। जैसे मैं बार-बार लिखता हूं कि मोदी-शाह के हाथों भाजपा, संघ का अधोपतन जब होगा तो इतना बुरा होगा कि हिंदुओं का राजनीतिक दर्शन हमेशा के लिए कलंकित बनेगा और इतिहास अंततः तुगलकी-अहंकारी दास्तां लिखे हुए होगा। अहंकार का मौजूदा दायरा बहुत व्यापक है। जैसे मोदी-शाह का अहंकार कि मेरे फड़नवीस, मेरे खट्टर, मेरे रघुवर, मेरे योगी, मेरे सोनोवाल तो इनके आगे भाजपा के दूसरे नेताओं, विधायकों-कार्यकर्ताओं को बिल्कुल नही पूछना। संघ के संगठन मंत्री भी फालतू, सब मानो पेड नौकर या रेंगती चींटियां। तभी रघुवर दास ने अमरप्रीत काले को जमशेदपुर पश्चिम के इलाके में चींटी की… Continue reading काले का श्राप व अहंकार को थप्पड़!

मोदी, शाह क्या सुन रहे हैं खतरे की घंटी?

भारतीय जनता पार्टी के दोनों शीर्ष नेता क्या खतरे की घंटी सुन पा रहे हैं या नागरिकता कानून के शोर ने उनके कान बंद कर रखे हैं? एक तरफ नागरिकता कानून का देशव्यापी विरोध है और विरोधियों के खिलाफ भाजपा समर्थकों की नारे लगाती भीड़ है, जिसका नारा है- देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को, और दूसरी ओर झारखंड के चुनाव नतीजे की गूंज है। अगर नागरिकता कानून के शोर को चीर कर झारखंड में बजी खतरे की घंटी की आवाज मोदी और शाह के कानों तक पहुंची है तो उनको इस आवाज को गंभीरता से लेना होगा। झारखंड और इससे पहले महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव नतीजों के कुछ सबक हैं, जिसे अगर भाजपा नहीं समझती है तो उसके लिए आने वाले दिनों में और मुश्किल होगी। सबसे पहला सबक यह है कि भाजपा को सहयोगियों की जरूरत है। सहयोगी पार्टियों के बगैर ज्यादातर राज्यों में भाजपा के लिए चुनाव जीतना और सरकार बनाना मुश्किल है। पहले महाराष्ट्र में यह बात साबित हुई और अब झारखंड में भी इसका प्रमाण मिल गया है। दोनों राज्यों में भाजपा के पास बहुत पुरानी और भरोसेमंद सहयोगी पार्टियां थीं पर दिल्ली की ओर से प्रदेश में चुन कर बैठाए गए… Continue reading मोदी, शाह क्या सुन रहे हैं खतरे की घंटी?

झारखंड में भाजपा की बुरी हार!

रांची। भारतीय जनता पार्टी झारखंड विधानसभा का चुनाव हार गई है। नतीजों की पूरी घोषणा होने से पहले ही मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हार मान ली। करीब 50 मौजूदा विधायकों के साथ चुनाव मैदान में उतरी भाजपा सिर्फ 25 सीटें जीत पाई। झारखंड मुक्त मोर्चा, कांग्रेस और राजद गठबंधन ने राज्य की 81 विधानसभा सीटों में से 47 पर जीत दर्ज की है। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 41 सीट का है। गठबंधन ने जेएमएम के नेता हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करके चुनाव लड़ा था। इसलिए वे राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। झारखंड की 81 सीटों पर पांच चरण में मतदान हुआ था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्य़क्ष अमित शाह ने प्रचार में पूरी ताकत लगाई थी। पर उनकी मेहनत भाजपा को वापस सत्ता नहीं दिला सकी। पिछले चुनाव में भाजपा ने 37 सीटें जीती थीं। बाद में बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम के छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे, जिससे उसकी संख्या 43 हो गई है। इस बार चुनाव से पहले भाजपा आधा दर्जन से ज्यादा दूसरी पार्टियों के विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कराया था। बहरहाल, मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ दोनों चुनाव हार… Continue reading झारखंड में भाजपा की बुरी हार!

हेमंत ने भाजपा पर किया हमला

रांची। विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद झारखंड मुक्त मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन ने भाजपा के ऊपर तीखा हमला किया। उन्होंने नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी को लेकर भाजपा को निशाना बनाया और कहा कि भाजपा का काम देश के लोगों को बांटना है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा देश के लोगों को लाइन में लगाने में भरोसा करती है। हेमंत सोरेन ने नतीजों पर कहा कि यह झारखंड में बदलाव का दिन है और उनके लिए संकल्प लेने का दिन है। चुनाव नतीजों में निर्णायक बढ़त मिलने के बाद जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष और भावी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रेस कांफ्रेंस की और राज्य की जनता को धन्यवाद दिया। हेमंत सोरेन ने कहा- इस राज्य के लिए एक नया अध्याय शुरू होगा लेकिन मेरे लिए यह संकल्प लेने का समय है। उन्होंने कहा- निश्चित रूप से आज की यह जीत झारखंड के लोगों के लिए उत्साह का दिन तो है कि, लेकिन मेरे लिए भी आज का दिन एक संकल्प लेने का दिन है। राज्य की जनता और जहां के लोगों की आकांक्षाओंको पूरा करने का संकल्प। हेमंत सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और अपने पिता शिबू सोरेन को पार्टी… Continue reading हेमंत ने भाजपा पर किया हमला

चिदंबरम ने कहा विपक्ष एकजुट हो!

नई दिल्ली। झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन की जीत के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भाजपा पर निशाना साधा और रविवार को कहा कि भाजपा अजेय नहीं है और सभी राजनीतिक दलों को उसके खिलाफ एकजुट हो जाना चाहिए। उन्होंने ट्विट कर कहा- महाराष्ट्र में झटका लगा, हरियाणा में झटका लगा और झारखंड में पराजय मिली। 2019 में यह भाजपा की कहानी है। उधर, चेन्नई में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ डीएमके के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा- हम झारखंड की जनता का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने इतना बड़ा बहुमत दिया है। चिदंबरम ने कहा- भाजपा अजेय नहीं है। अगर सभी राजनीतिक दल साथ मिल जाएं और देश के सामने खड़े खतरे को समझ जाएं तो निश्चित तौर पर भाजपा पराजित हो सकती है। भविष्य के चुनावों में भी भाजपा की हार होगी।

झारखंड में मतगणना शुरू, जेएमएम कांग्रेस गठबंधन को बढ़त

रांची। झारखंड विधानसभा की 81 सीटों के लिए पांच चरणों में 30 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच हुए मतदान के बाद सभी सीटों के लिए ईवीएम में बंद मतों की गणना सोमवार सुबह शुरू हो गई है। शुरुआती रुझानों में जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन को बढ़त मिली हुई है।  निर्वाचन आयोग ने सभी जिला मुख्यालयों में इस बाबत इंतजाम कर लिए हैं। पहला परिणाम सोमवार दोपहर 1 बजे आने की उम्मीद है। मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा(झामुमो)-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन के बीच है। सबकी निगाहें जमशेदपुर पूर्वी सीट पर टिकी रहेंगी। मुख्यमंत्री रघुवर दास वर्ष 1995 से यहां से जीतते आ रहे हैं। उनके खिलाफ उनके पूर्व-कैबिनेट सहयोगी सरयू राय मैदान में हैं। राय ने पार्टी से टिकट कटने के बाद बगावत कर मुख्यमंत्री की राह का कांटा बनने का फैसला किया। अन्य महत्वपूर्ण सीटें हैं- दुमका और बरेट, जहां से झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चुनाव लड़ रहे हैं। दुमका में वह समाज कल्याण मंत्री लुइस मरांडी के खिलाफ मैदान में हैं।

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