माहौल और मैनेजमेंट का महा मुकाबला

प्रदेश में होने जा रहे एक लोकसभा और तीन विधानसभा के उपचुनाव में अलग-अलग जगह विभिन्न प्रकार की परिस्थितियां हैं। कहीं माहौल है तो कहीं मैनेजमेंट है और शुरुआत से ही मुकाबला प्रतिष्ठा का बन गया है।

सियासत में साए से डरे संगठन और लीडर…

मशहूर शायर दुष्यंत कुमार का ग़ज़ल संग्रह ‘साए में धूप’ शेरो शायरी के शौकीनों के बीच बहुत पसन्द किया जाता है। इसमें समाज और सियासत के साथ हुक्मरानों पर काफी कुछ लिखा गया है।

लोकसभा उपचुनाव भाजपा के लिए चुनौती

लोकसभा की तीन सीटों का उपचुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है तो कांग्रेस के लिए एक बड़ा अवसर है। भाजपा के सामने अपनी दो सीटें बचाने की चुनौती है

लोकसभा के उपचुनाव नहीं चाहती है भाजपा

इस बीच भाजपा की और सांसद लॉकेट चटर्जी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। वे भबानीपुर सीट पर ममता बनर्जी के खिलाफ प्रचार में नहीं गएं, जिसके बाद से अटकलें शुरू हुई हैं।

मुश्किल दौर से गुजरती कांग्रेस भी भाजपा के लिए चुनौती

कांग्रेस पार्टी इस समय अपने अधिकतम मुश्किल के दौर से गुजर रही है कभी पूरे देश में एक छत्र राज्य करने वाली पार्टी आज जिन दो – तीन राज्यों में सिमट गई है वहां भी विवाद है।

कमजोर शिवराज.. कंफ्यूज भाजपा ‘चार उपचुनाव’ कैसे जिताएगी..!

बीजेपी कंफ्यूजन क्रिएट कर रही या फिर अब मिशन 2023 को ध्यान में रखते हुए कोआर्डिनेशन जरूरी.. इसलिए पार्टी के अंदर माथापच्ची खत्म होने का नाम नहीं ले रही

सांसदों पर संभव कार्रवाई?

उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू उच्च सदन के कुछ सांसदों पर कार्रवाई के बारे में विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस बार मॉनसून सत्र में विपक्षी पार्टियों ने पेगासस जासूसी मामले पर चर्चा और कृषि कानूनों के विरोध में जम कर हंगामा किया

लोकतंत्र के मंदिर की असली बेअदबी क्या है?

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू भावुक हो गए। उन्होंने राज्यसभा में विपक्षी सांसदों के हंगामे को लेकर कहा कि लोकतंत्र के मंदिर की बेअदबी हुई है और उनको रात भर नींद नहीं आई।

भाजपा ने दो दिन का व्हिप जारी किया

संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में सरकार जरूरी विधायी काम पूरे कराना चाहती है इसलिए उसने अगले दो दिन यानी 10 और 11 अगस्त के लिए व्हिप जारी किया है

मजबूरी में सही कदम

जब यूपीए सरकार ने ये प्रावधान किया, तो भाजपा ने उसे टैक्स आतंकवाद कहा था। मगर विदेशी कंपनियों के मामले में अगर ऐसा प्रावधान आतंकवाद है, तो आखिर देश के नागरिकों के लिए ऐसा कैसे नहीं है? फिर इस आतंकवाद को भाजपा सरकार ने अपने शासनकाल में सात साल तक क्यों जारी रखा?

संसद में होने वाला हंगामा नहीं दिखाया जाएगा!

तो क्या अब संसद में विपक्षी पार्टियां अगर हंगामा करती हैं, सदन के वेल में पहुंच कर नारेबाजी करती हैं और सदन की कार्यवाही बाधित करती हैं तो उसे नहीं दिखाया जाएगा

चार लोग चला रहे हैं देश: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को बजट पर चर्चा के दौरान लोकसभा में केंद्र सरकार पर जम कर निशाना साधा। बजट की बजाय वे पूरे समय किसानों की बात करते रहे।

संसदीय उपायों की अनदेखी ठीक नहीं

संसद का मॉनसून सत्र कई मामलों में अनोखा रहा। इसमें कई चीजें पहली बार हुईं और कई चीजें ऐसी हुईं, जिनके बारे में कहा जा सकता है कि कई बरसों से इनकी तैयारी हो रही थी। पिछले कुछ बरसों से जिस तरह से संसदीय परंपराओं और संसदीय उपायों की अनदेखी की जा रही थी, उसका चरम रूप संसद के मॉनसून सत्र में दिखा।

श्रम कानूनों में बदलाव से किसका फायदा?

शिक्षा और कृषि का ‘कल्याण’ करने के बाद केंद्र सरकार ने मजदूरों के ‘कल्याण’ का बीड़ा उठाया है। इसके लिए विपक्ष की गैरहाजिरी में बिना बहस कराए केंद्र सरकार ने तीन लेबर कोड बिल पास कराए हैं।

बिना विपक्ष के लेबर कोड बिल पास

कृषि से जुड़े तीन विधेयकों को तो केंद्र सरकार ने विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनि मत से पास कराया था परंतु मजदूरों से जुड़े तीन विधेयक सरकार ने विपक्ष की गैरहाजिरी में ही राज्यसभा से पास करा लिया है।

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