पारस-शिलाओं के स्पर्श से वंचित ओम बिरला
चलिए, जो हुआ, सो, हुआ। बिरला फिर आसनारूढ़ हैं। उन्हें होना ही था। कोई दूर-दूर तक सपने में भी यह नहीं सोच रहा था कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव पारित हो जाएगा। सो, सब प्रतीकात्मक था। मगर बिरला अगर थोड़े भी संवेदनशील हैं तो यह अहसास उन्हें ज़रूर कचोट रहा होगा कि भारतीय संसद के इतिहास में वे सिर्फ़ चौथे स्पीकर हैं, जिन के ख़िलाफ़ नियम 94-सी के तहत सदन में प्रस्ताव रखा गया। स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में ध्वनिमत से गिर भले ही गया, मगर उस पर हुई चर्चा से यह ध्वनि देश...