Prashant Kishore

  • पीके का तमिलनाडु अभियान शुरू

    प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बुरी तरह से बिहार विधानसभा का चुनाव हारी है। उसे ए भी सीट नहीं मिली और सिर्फ साढ़े तीन फीसदी वोट मिले हैं। दो तीन को छोड़ कर लगभग सभी की जमानत जब्त हो गई। उसके बाद प्रशांत किशोर ने भितिहरवा के गांधी आश्रम में एक दिन का उपवास किया और लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया। अब कहा जा रहा है कि वे एक बार फिर चुनाव प्रबंधन वाले काम में सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने तमिलनाडु में फिल्म स्टार विजय के लिए प्रचार अभियान शुरू किया है। गौरतलब है कि बिहार में...

  • पीके से इतने सवाल पूछने का क्या मतलब?

    प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अभी दूसरी हारी हुई पार्टियां अपने जख्म सहला रही हैं लेकिन सबसे बुरी तरह हारी जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर फिर अपनी पूरी टीम के साथ मीडिया के सामने आए और सभी सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कुछ बातों पर माफी मांगी और बिहार की राजनीति में डटे रहने का ऐलान किया। उनसे सबसे ज्यादा सवाल यह पूछा गया कि उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार को 25 से ज्यादा सीटें आएंगी तो वे राजनीति छोड़ देंगे और अगर जन सुराज पार्टी को साधारण बहुमत जितनी सीटें आती हैं तो वे इसको...

  • शत्रुघ्न सिन्हा आगे क्या करेंगे?

    पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने एक सीट छोड़ कर बिहार की किसी सीट पर प्रचार नहीं किया। एक सीट पर भी उन्होंने पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार का प्रचार किया। उन्होंने पटना की कुम्हरार सीट के उम्मीदवार केसी सिन्हा को वोट देने की अपील की थी। गौरतलब है कि केसी सिन्हा शिक्षक रहे हैं और उनकी गणित की किताबें बिहार में कई पीढ़ियों ने पढ़ा है। वे कायस्थ जाति से आते हैं। तीसरी बात यह है कि वे जन सुराज पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे। ध्यान रहे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत...

  • प्रशांत किशोर की राजनीति का क्या होगा?

    वैसे तो प्रशांत किशोर ने कहा है कि वे बिहार की राजनीति में टिकेंगे। उन्होंने कुछ दिन पहले कहा था कि वे कोई भी काम 10 साल तक जरूर करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में नौकरी की तो 10 साल तक किया। इसके बाद चुनाव प्रबंधन की कंपनी बना कर वह काम किया तो वह भी 10 साल करने के बाद छोड़ा और अब 2022 में राजनीति में आए हैं तो कम से कम 10 साल जरूर लगाएंगे। इसका मतलब है कि वे 2032 तक राजनीति में सक्रिय रहने वाले हैं, ऐसा उन्होंने खुद संकेत दिया है। लेकिन सवाल है...

  • बिहार कल क्या कहेगा?

    प्रशांत किशोर का दावा सही हुआ, तो अन्य राज्यों में भी राजनीति के नए उद्यमी प्रोत्साहित होंगे। उससे अभी जारी सियासी एकरसता टूटेगी। मगर एनडीए जीता, तो नकदी ट्रांसफर कर वोट “खरीदने” की कायम हो चुकी परिपाटी और आगे बढ़ेगी। बिहार विधानसभा के चुनाव में मतदान का रिकॉर्ड बना। वहां 66.91 प्रतिशत मतदान होना अपने-आप में उल्लेखनीय आंकड़ा है, जबकि यह तथ्य इसे और भी महत्त्वपूर्ण बना देता है कि महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6 फीसदी रहा। यह वोट डालने आए पुरुषों की संख्या (62.8 प्रतिशत) से लगभग दस फीसदी ज्यादा है। ऐसे असामान्य मतदान पैटर्न ने चुनाव नतीजों को...

  • पीके ने भी मैदान छोड़ दिया

    एक तरफ राष्ट्रीय जनता दल के अदृश्य दबाव में सरेंडर करने की खबर है तो दूसरी ओर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के भी मैदान छोड़ देने की चर्चा है। पिछले 10 दिन से प्रशांत किशोर लगभग पूरी तरह से मैदान से बाहर हैं। सोशल मीडिया पर उनका अभियान कमजोर हो गया है। पहले हजारों की संख्या में एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम हैंडल से पीके  की बातों को प्रचारित किया जाता था। कई तटस्थ दिखने वाले हैंडल से प्रशांत किशोर के बारे में प्रोपेगेंडा चलता रहता था। वे खुद हर दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करते थे और विपक्षी पार्टियों पर निशाना...

  • पीके ने पहले ही मुस्लिम उतार दिए

    प्रशांत किशोर ने वादे के मुताबिक नौ अक्टूबर को अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। उन्होंने कहा था कि वे दूसरी सभी पार्टियों से पहले उम्मीदवार घोषित करेंगे, वह वादा उन्होंने पूरा कर दिया। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह वादा भी किया था कि वे मुस्लिम उम्मीदवार वही उतारेंगे, जहां राष्ट्रीय जनता दल का मुस्लिम उम्मीदवार नहीं होगा। असल में उनके ऊपर भाजपा की बी टीम होने का आरोप लग रहा था। कहा जा रहा था कि वे राजद का मुस्लिम वोट काटने की राजनीति कर रहे हैं। इससे बचने के लिए उन्होंने कहा कि वे राजद...

  • बिहार में एनडीए में छिड़ा घमासान

    बिहार में इन दिनों सभी पार्टियों की राजनीति प्रशांत किशोर तय कर रहे हैं। उनके बयानों से पार्टियों की लाइन तय हो रही है और सारी पार्टियां इस इंतजार में हैं कि प्रशांत किशोर कब अपने उम्मीदवारों की घोषणा करते हैं क्योंकि सभी पार्टियों के उम्मीदवार उनके प्रत्याशी के हिसाब से तय होंगे। प्रशांत किशोर के बयान से अभी सबसे ज्यादा घमासान एनडीए के अंदर मचा है। प्रशांत ने भाजपा और जनता दल यू दोनों के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि उनके कई आरोप राजनीतिक प्रकृति के हैं लेकिन कई भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इन आरोपों को लेकर...

  • भाजपा पर हमले से क्या बदलेगी पीके की छवि

    बिहार में जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर के निशाने पर अब भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। उनका पहला निशाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं और उसके बाद भाजपा के नेता हैं। पहले वे राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं पर ज्यादा हमले करते थे। लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव उनके पसंदीदा टारगेट थे। उन्होंने  तेजस्वी के लिए नौवीं फेल का जुमला ऐसा स्थापित किया कि लोगों की जुबान पर चढ़ गया। लेकिन अब वे राजद पर कम हमला कर रहे हैं। कांग्रेस पर तो कभी हमला करते ही नहीं हैं और कम्युनिस्ट पार्टियों के खिलाफ बोलने के लिए कुछ...

  • प्रशांत किशोर क्या चिराग की पोल खोलेंगे?

    यह लाख टके का सवाल है कि क्या चिराग पासवान की गाहे बगाहे तारीफ करने वाले प्रशांत किशोर अब उनकी पोल खोलेंगे? जनता दल यू के नेता और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने एक बयान को लेकर प्रशांत किशोर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। असल में प्रशांत किशोर ने एक कार्यक्रम में कह दिया कि अशोक चौधरी ने टिकट खरीद कर अपनी बेटी को सांसद बनाया है। गौरतलब है कि अशोक चौधरी खुद जनता दल यू में हैं लेकिन उनकी बेटी चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ कर जीती हैं।...

  • आरसीपी के आने से पीके को ताकत?

    बिहार में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। किसी समय नीतीश कुमार के नंबर दो रहे जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और नरेंद्र मोदी सरकार में स्टील मंत्री रहे रामचंद्र प्रसाद सिंह उर्फ आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी का विलय जनसुराज पार्टी में कर दिया है। वे पूरी पार्टी के साथ प्रशांत किशोर की पार्टी में शामिल हो गए हैं। यह हाल के दिनों का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है। आरसीपी सिंह अपनी पार्टी बना कर या उससे पहले थोड़े समय भाजपा से जुड़ कर ज्यादा प्रभावी राजनीति नहीं कर पाए थे लेकिन उनके प्रशांत किशोर के साथ जुड़ने से बिहार...

  • प्रशांत किशोर को बड़बोलेपन का नुकसान

    जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर की पटना गांधी मैदान में बुलाई रैली बुरी तरह से फ्लॉप हो गई। उन्होंने पांच लाख लोग लाकर गांधी मैदान भर देने का दावा किया था लेकिन 50 हजार लोग भी नहीं पहुंचे। खुद प्रशांत किशोर दिन भर भागदौड़ करते रहे। यह आरोप लगाते रहे कि उनके समर्थकों की गाड़ियों को पटना के बाहर रोका जा रहा है। वे खुद गंगा के किनारे लगा कथित जाम छुड़ाने पहुंच गए थे और दो बजे की रैली में सात बजे के बाद पहुंचे। इस रैली का इतना मुद्दा नहीं बनता अगर उन्होंने पटना सहित पूरे...

  • तमिल सुपरस्टार विजय और पीके क्या करेंगे?

    india election 2025 : तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी अन्ना डीएमके और भाजपा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तालमेल की बात शुरू होने के साथ ही यह सवाल उठने लगा है कि अब तमिल सुपरस्टार विजय का क्या होगा? इसी के साथ यह भी सवाल है कि सुपरस्टार चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर यानी पीके क्या करेंगे? पीके ने तमिलनाडु में विजय को चुनाव लड़ाने का जिम्मा उठाया है। (india election 2025) पिछले महीने महाशिवरात्रि के दिन विजय की पार्टी टीवीके के एक साल पूरे होने के मौके पर हुए कार्यक्रम में प्रशांत किशोर ने कहा कि...

  • तेजस्वी के खिलाफ लड़ने की प्रशांत की तैयारी

    चुनाव रणनीतिकार और बिहार में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा है कि उनकी पार्टी के किसी नेता या कार्यकर्ता ने सलाह दी है कि उनको राघोपुर विधानसभा सीट से राजद के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहिए। इससे पहले प्रशांत किशोर ने कहा था कि उनकी पार्टी कहेगी तो वे तेजस्वी यादव के खिलाफ लड़ने को तैयार हैं। ध्यान रहे राघोपुर लालू प्रसाद उनके परिवार का गढ़ रहा है। यह अलग बात है कि 2010 में जनता दल यू के सतीश यादव ने राघोपुर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी...

  • पीके चुनाव लड़ेंगे या लड़ाएंगे?

    चुनाव रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को लेकर बिहार में कंफ्यूजन पैदा हो गया है। एक तरफ उनकी पार्टी को बिहार की सभी 243 सीटों पर विधानसभा का चुनाव लड़ना है और दूसरी ओर खुद प्रशांत किशोर तमिलनाडु में नई बनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके का चुनाव अभियान संभालने जा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय का अंतर नहीं है। इस साल नवंबर में बिहार का चुनाव होगा और अगले साल मई में तमिलनाडु का चुनाव है। यानी छह महीने का अंतराल है। उनकी बनाई संस्था आईपैक पहले...

  • पटना पुलिस ने प्रशांत किशोर को किया गिरफ्तार

    पटना। बिहार में बीपीएससी परीक्षा (BPSC Exam) में हुई गड़बड़ी को लेकर जन सुराज पार्टी (जसुपा) के मुखिया प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) पटना के गांधी मैदान में दो जनवरी से आमरण अनशन पर बैठे थे। इसी बीच सोमवार सुबह लगभग 4 बजे पटना पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, लेकिन बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मेडिकल जांच के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर और कुछ अन्य लोगों द्वारा अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर प्रतिबंधित क्षेत्र गांधी मैदान के गांधी मूर्ति...

  • छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए पीके

    BPSC Protest : बिहार में राजनीति करने उतरे चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर कहा करते थे कि उनको सड़क पर उतरने की जरुरत नहीं है। जब उन्होंने पार्टी बना कर चुनाव लड़ने का फैसला किया तो उनसे पूछा जाता था कि बिहार में इतनी पुरानी पार्टियां हैं, जिनकी जड़ें बहुत गहरी हैं, जबकि उनकी पार्टी ने आजतक कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं किया और न किसी मसले पर प्रदर्शन किया है। इसके जवाब में वे कहते थे कि वे चुनाव लड़ना और लड़ाना जानते हैं। उनको किसी आंदोलन या प्रदर्शन में शामिल होने की जरुरत नहीं है। लेकिन अब प्रशांत किशोर भी...

  • प्रशांत किशोर क्या करेंगे?

    बिहार में प्रशांत किशोर को बड़ा झटका लगा है। देश के सबसे बड़े चुनाव रणनीतिकार, जिनको प्रधानमंत्री और कई मुख्यमंत्री बनवाने का श्रेय जाता है वे अपनी पार्टी बना कर लड़े और सभी चार सीटों पर चुनाव हार गए। उन्होंने दावा किया था कि बिहार की चार सीटों पर उपचुनाव जीत कर वे 2025 के चुनाव को सेटल कर देंगे। उन्होंने कहा था कि इन उपचुनावों से ही पता चल जाएगा कि जन सुराज पार्टी स्थापित हो गई है और वह अगला चुनाव जीतेगी। लेकिन ऐसा  नहीं हो सका। उनकी पार्टी चार में से कोई सीट नहीं जीत पाई और...

  • पीके ने उपचुनाव को बनाया दिलचस्प

    चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को दिलचस्प बना दिया है। उनको पता है कि यह जोखिम का काम है क्योंकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अगर उपचुनावों में उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी तो उससे माहौल बिगड़ेगा और उनकी काबिलियत पर भी सवाल उठेगा। फिर भी उन्होंने जोखिम लिया है और चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। सभी चार सीटों पर उनके उम्मीदवारों की वजह से चुनाव त्रिकोणात्मक हो गया है। वे पार्टियों के सामाजिक समीकरण को भी तोड़ रहे हैं और इससे कम से कम दो सीटों,...

  • प्रशांत किशोर के प्रबंधन पर बड़ा सवाल

    प्रशांत किशोर देश के सबसे बड़े चुनाव रणनीतिकार और प्रबंधक रहे हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। उन्होंने बिहार में पदयात्रा की और उसके बाद अपने जनसुराज अभियान को जन सुराज पार्टी में बदल दिया। इसमें भी कोई परेशानी नहीं है। लेकिन उन्होंने उपचुनाव के लिए जिस तरह से उम्मीदवार चुने हैं उससे उनके प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। चार सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं और चार सीटों के उपचुनाव में ही चुनने के बाद उनको दो उम्मीदवार बदलने पड़े हैं। उनका कहना है कि वे जनता की राय लेकर और जनता के बीच से ही उम्मीदवार चुनेंगे फिर...

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