Ram Mandir donation scam

  • राम मंदिर का कलंक

    यह मंदिर ही नहीं, सत्ता भी चलाने की अयोग्यता का अधिक बड़ा संकेत है। वैयक्तिक ईमानदारी इस की कैफियत नहीं हो सकती। उस से कई गुणा अधिक महत्वपूर्ण समाज की सुरक्षा, न्याय, और सुव्यवस्था कायम करना है। शासक का मूल्यांकन इतिहास इसी से करता है -- न कि वह खुद कैसा था।…. वे राजनीतिक काम के लिए अयोग्य दिखते हैं। ऊपर से लेकर नीचे तक उन के नेता कार्यकर्ता असल कसौटी पर ढीले हैं। राम मंदिर का कचरा करना इस का उदाहरण भर है। अब वे इसे मामूली दिखाकर रफा-दफा की प्रतीक्षा करते लग रहे हैं। "मंदिर में चोरी आप...

  • राहुल मंदिर मामले में नहीं बोल रहे हैं

    कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय राय ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी पर खूब राजनीति की। वे अपनी पार्टी के सांसदों और अन्य नेताओं के साथ अयोध्या पहुंचे। वहां उनको हाउस अरेस्ट किया गया। पार्टी के दूसरे नेताओं ने प्रदर्शन किया और पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज से कराने की मांग की। दूसरी विपक्षी पार्टियों खास कर उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी और कांग्रेस की सहयोगी समाजवादी पार्टी ने भी इसे मुद्दा बनाया है, बल्कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस मामले का खुलासा करने वाले नेता हैं।...

  • मंदिर में सब एक दूसरे को बचा रहे हैं

    अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में लीपापोती का काम जोर शोर से चल रहा है। ऐसा लग रहा है कि सब एक दूसरे को बचाने में लगे हैं। कोई नहीं चाहता है कि ईमानदारी से जांच हो और गड़बड़ी करने वालों या उनको बचाने वालों की पहचान करके उनको सजा दिलाई जाए। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की छह जुलाई की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद गिरी ने जो बातें कही उनका लब्बोलुआब यह था कि कुछ प्रक्रियागत...

  • चढ़ावा चोरी के अलावा और भी गड़बड़ियां हैं!

    श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का विवाद तो चल ही रहा है लेकिन धीरे धीरे यह भी पता चल रहा है कि चढ़ावे में चोरी के अलावा और भी कई विवाद हैं। कई और जगह घोटाले की बात आ रही है। इसमें दो चर्चा सबसे खास है। पहली तो यह कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से तीन या चार कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिन पर 125 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। लखनऊ से संचालित हो रही एसआईटी की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। कहा जा रहा है कि वह सवा सौ करोड़ रुपए...