राम मंदिर का कलंक
यह मंदिर ही नहीं, सत्ता भी चलाने की अयोग्यता का अधिक बड़ा संकेत है। वैयक्तिक ईमानदारी इस की कैफियत नहीं हो सकती। उस से कई गुणा अधिक महत्वपूर्ण समाज की सुरक्षा, न्याय, और सुव्यवस्था कायम करना है। शासक का मूल्यांकन इतिहास इसी से करता है -- न कि वह खुद कैसा था।…. वे राजनीतिक काम के लिए अयोग्य दिखते हैं। ऊपर से लेकर नीचे तक उन के नेता कार्यकर्ता असल कसौटी पर ढीले हैं। राम मंदिर का कचरा करना इस का उदाहरण भर है। अब वे इसे मामूली दिखाकर रफा-दफा की प्रतीक्षा करते लग रहे हैं। "मंदिर में चोरी आप...
