kishori-yojna
राजद्रोह कानून पर कोर्ट ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कानून पर पुनर्विचार में कितना समय लगेगा और इस कानून का क्या किया जाए।

खत्म होगा राजद्रोह कानून!

सरकार ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव की भावना के अनुरूप कानून पर पुनर्विचार को तैयार।

सरकार चाहती है राजद्रोह कानून

केंद्र सरकार स्वतंत्रता की लड़ाई को कुचलने के लिए बनाए गए राजद्रोह कानून को बनाए रखना चाहती है।

राजद्रोह कानून पर केंद्र ने मांगी मोहलत

राजद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने अपना जवाब नहीं दिया है।

चुनावी रण में बढ़ी Rahul Gandhi की मुश्किलें! असम में रोजद्रोह के एक हजार मामले दर्ज कराएगी BJP

असम में भाजपा की ओर से कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही जा रही है।

निलंबित आईपीएस की गिरफ्तारी पर रोक

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सरकार बदलने पर राजद्रोह के मामले दायर करना एक ‘परेशान करने वाली प्रवृत्ति’ है।

सर्वोच्च हस्तक्षेप की जरूरत

यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि हाल में बात बहुत आगे निकल गई है। कश्मीर से लेकर नागरिकता संशोधन कानून तक के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक अधिकारों की रक्षा की उम्मीदों को पूरा नहीं किया है। इसलिए अब अगर वह अपनी छवि की भरपाई करना चाहता है, तो उसे कहीं बड़ी पहल करनी होगी।

राजद्रोह-कानूनः लोकतंत्र का कलंक

sedition law : सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से अपील की है कि वह राजद्रोह के कानून ( sedition law ) को अब खत्म करे। भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए अंग्रेजों ने बनाई थी ताकि किसी भी सत्याग्रही पर बगावत या आतंक का आरोप लगाकर उसे जेल में ठूंस दिया जाए। गांधीजी पर भी यह लागू हुई थी। इसी धारा को आधार बनाकर अंग्रेज सरकार ने बाल गंगाधर तिलक को म्यांमार की जेल में निर्वासित कर दिया था। इस धारा का इस्तेमाल स्वतंत्र भारत में अब भी जमकर इस्तेमाल होता है। अंग्रेज तो चले गए लेकिन यह धारा नहीं गई। इस धारा के तहत 2014 से 2019 तक 595 लोग गिरफ्तार किए गए लेकिन उनमें से सिर्फ 10 लोगों को दोषी पाया गया। इसी तरह की एक धारा हमारे सूचना-कानून में भी थी। इस धारा 66 ए को कई साल पहले सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था लेकिन पुलिस अपनी आदत से मजबूर है। वह इसी धारा के तहत लोगों को गिरफ्तार करती रहती है। ये धाराएं भारतीय लोकतंत्र का कलंक हैं। Read also: कावड़-यात्रा और महामारी अभिव्यक्ति की आजादी की हत्या है। हाल ही में पत्रकार विनोद दुआ, आंध्रप्रदेश के दो टीवी चैनलों और मणिपुर के पत्रकार वांगखेम… Continue reading राजद्रोह-कानूनः लोकतंत्र का कलंक

अंग्रेजों का राजद्रोह कानून क्यों: सुप्रीम कोर्ट

sedition law supreme court : नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने ‘औपनिवेशिक काल’ के राजद्रोह संबंधी दंडात्मक कानून के ‘भारी दुरुपयोग’ पर बृहस्पतिवार को चिंता जाहिर की। केंद्र से सवाल किया कि स्वतंत्रता संग्राम को दबाने के वास्ते महात्मा गांधी जैसे लोगों को ‘चुप’ कराने के लिए ब्रितानी शासनकाल में इस्तेमाल के लिए प्रावधान को समाप्त क्यों नहीं किया जा रहा? प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (राजद्रोह) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक पूर्व मेजर जनरल और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की याचिकाओं पर गौर करने पर सहमति जताते हुए कहा कि उसकी मुख्य चिंता ‘कानून का दुरुपयोग’ है। पीठ ने मामले में केंद्र को नोटिस जारी किया है। Read also चीन ने जताई बातचीत की जरूरत इस गैर-जमानती प्रावधान के तहत ‘भारत में कानून द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमानना या असंतोष को उकसाने या उकसाने की कोशिश करने वाला’ भाषण देना या अभिव्यक्ति एक अपराध है जिसके तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। पीठ ने कहा अटॉर्नी जनरल) हम से सवाल किया कि यह औपनिवेशिक काल का कानून है और… Continue reading अंग्रेजों का राजद्रोह कानून क्यों: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस चंद्रचूड़ और उम्मीदें!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीनेशन नीति पर यू-टर्न क्यों लिया? इसके कई कारण हो सकते हैं। राज्यों का दबाव था, उनको खुद भी लग रहा था कि वैक्सीनेशन की गाड़ी पटरी से उतर गई थी और यह भी एक कारण था कि वैक्सीन की उपलब्धता अब दिखने लगी थी। लेकिन जो मुख्य कारण था वह सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी थी कि केंद्र सरकार की वैक्सीनेशन तर्कहीन और मनमानी है। इसके बाद ऐसा नहीं लग रहा था कि सरकार किसी भी तर्क से अपनी इस नीति को अदालत में न्यायसंगत ठहरा पाएगी। तभी सोमवार को जब प्रधानमंत्री मोदी ने वैक्सीनेशन नीति पर यू-टर्न की घोषणा की तो सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा लोगों को जस्टिस चंद्रचूड़ को धन्यवाद कहा और बधाई दी। यह भी पढ़ें: मोदी का चेहरा बचाना या कुछ और बात? लेकिन इसके साथ ही उनसे लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गईं। ध्यान रहे जस्टिस चंद्रचूड़ ने वैक्सीन नीति के साथ साथ राजद्रोह कानून को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने इस कानून की समीक्षा की जरूरत बताई थी। सुनवाई के समय उन्होंने सरकारों पर तंज करते हुए सवालिया लहजे में कहा था कि गंगा में बहती लाशों के विजुअल दिखाने पर चैनल वालों… Continue reading जस्टिस चंद्रचूड़ और उम्मीदें!

जज ने जो कहा

दिल्ली की एक निचली अदालत ने जो कहा, वैसी विवेकपूर्ण बात की आशा उच्चतर न्यायपालिका से की जाती है।

आखिर इतने “राजद्रोह” क्यों!

जिस थोक भाव से देश में राजद्रोह के मामले दर्ज हो रहे हैं, वह खुद सरकार के लिए आत्म निरीक्षण का विषय मुहैया कराते हैं।

और लोड करें