जज ने जो कहा

दिल्ली की एक निचली अदालत ने जो कहा, वैसी विवेकपूर्ण बात की आशा उच्चतर न्यायपालिका से की जाती है।

आखिर इतने “राजद्रोह” क्यों!

जिस थोक भाव से देश में राजद्रोह के मामले दर्ज हो रहे हैं, वह खुद सरकार के लिए आत्म निरीक्षण का विषय मुहैया कराते हैं।

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