केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, डिजिटल पहल के तहत राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय कार्यक्रम चला रहा है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक केंद्र सरकार की इस योजना में अब 6000 से अधिक निशुल्क ई-बुक्स देश भर के पाठकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।
यही नहीं, इस उपलब्धि के साथ साथ साल 2026 को पठन वर्ष के रूप में चिह्नित करने का आह्वान किया जा रहा है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि देश में पढ़ने की संस्कृति और आदत को और अधिक प्रोत्साहन मिले। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय नामक इस महत्वपूर्ण डिजिटल लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया था। अब इसमें जो 6000 से अधिक निशुल्क ई- पुस्तकें पाठकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं, उनमें लगभग सभी आयु वर्ग के छात्रों का ध्यान रखा गया है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यूं तो यह पहल सभी उम्र के पाठकों के लिए है, लेकिन फिर भी विशेषकर बच्चों और किशोरों के लिए ज्ञान, मनोरंजन और सीखने के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बच्चों और किशोरों के ज्ञान में वृद्धि के उद्देश्य से यह शुरुआत की गई है।
दरअसल राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एक राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी है जिसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। इस लाइब्रेरी में हास्य, साहित्य, इतिहास, विज्ञान, जीवनी, कविता, कॉमिक्स, और अन्य कई विषयों की निशुल्क ई-बुक्स शामिल की गई हैं, जो विभिन्न उम्र के पाठकों के लिए उपयुक्त हैं।
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इस लाइब्रेरी की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसे देश के हर राज्य व प्रत्येक हिस्से को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यही कारण है कि यहां 23 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसा करते समय भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखा गया। इसका एक बड़ा लाभ यह है कि इस ई-पुस्तकालय की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक सुनिश्चित होती है। ये ई-बुक्स वेब, एंड्रॉइड और आइओएस ऐप सभी प्लेटफॉर्म पर पढ़ी जा सकती हैं।
इस पहल के तहत एक खास मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित की गई है। इस मोबाइल एप्लिकेशन के पाठक कहीं भी, कभी भी ई-बुक्स को पढ़ सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस ऐप में उम्र के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में पुस्तकें प्राप्त करने व पढ़ाने की सुविधा है। आयु को आधार बनाकर 3 से 8 वर्ष, 8 से 11 वर्ष, 11 से 14 वर्ष व 14 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए किताबें ढूंढने की सुविधा है।
यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत अध्यात्म और सीखने के अनुभव को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि यह डिजिटल लाइब्रेरी शैक्षणिक पुस्तकालयों और पारंपरिक पुस्तकों तक सीमित पहुंच के चक्र को तोड़ती है। साथ ही यह लाइब्रेरी हर क्षेत्र के छात्रों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का अवसर भी देती है।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के छात्रों को भी सुलभ ज्ञान संसाधन उपलब्ध कराना इस पहल का एक प्रमुख लक्ष्य है। इससे शिक्षा में समान अवसर भी सुनिश्चित हो पाएंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल पढ़ने की आदत को बढ़ावा देगी और युवाओं में ज्ञानवर्धन, सांस्कृतिक सजगता और रचनात्मकता को मजबूती देगी। शिक्षा मंत्रालय और नेशनल बुक ट्रस्ट मिलकर इस प्लेटफॉर्म को और व्यापक बनाने पर काम कर रहे हैं ताकि आने वाले वर्षों में इसमें और भी अधिक पुस्तकों और भाषाओं का समावेश हो सके।
Pic Credit : ANI
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