• युद्ध की फैली आग

    स्पष्टतः पश्चिम एशिया बिगड़ती हालत संयुक्त राष्ट्र के तहत बनी विश्व व्यवस्था के निष्प्रभावी होने का सबूत है। जब बातचीत से विवाद हल करने के मंच बेअसर हो जाते हैं, तभी बात युद्ध तक पहुंचती है। आज यह खतरनाक स्थिति हमारे सामने है। इजराइल पर ईरान के जवाबी हमले के साथ पश्चिम एशिया में युद्ध की आग और फैल गई है। यह पहला मौका है, जब ईरान फिलस्तीनी युद्ध में सीधे शामिल हुआ है। इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि एक अप्रैल को सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी दूतावास पर इजराइल के हमले से बनी। उस इजराइली हमले में 16 ईरानी...

  • एडवाइजरी किसके लिए?

    भारत सरकार गरीबी से बेहाल भारतीय मजदूरों को इजराइल भेजने में तब सहायक बनी। इसलिए अब सवाल उठा है कि ताजा एडवाइजरी किसके लिए जारी की गई है? क्या अब पैदा हुए नए खतरों के कारण भारत अपने मजदूरों को वहां से वापस लाएगा? इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की गहराती आशंका के बीच यह उचित ही है कि भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की। भारतीय नागरिकों से उन दोनों देशों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। ऐसी एडवाइजरी अनेक देशों ने अपने देशवासियों के लिए जारी की है। बिगड़ते हालात के...

  • चीन पर बदला रुख?

    अमेरिकी पत्रिका को दिए इंटरव्यू में मोदी ने कहा- ‘यह मेरा विश्वास है कि सीमा पर लंबे समय से जारी स्थिति का हल हमें तुरंत निकालना चाहिए, ताकि अपने द्विपक्षीय संबंधों में आई असामान्यता को हम पीछे छोड़ सकें।’ क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा बयान को चीन के बारे में भारत के रुख में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जाना चाहिए? चार साल से चल रहे तनाव के बाद अब मोदी मेल-मिलाप के मूड में दिख रहे हैं। मोदी ने ये टिप्पणियां एक अमेरिकी पत्रिका को दिए इंटरव्यू में की हैं। इससे उनकी बातों का महत्त्व और बढ़...

  • चीन- रूस की धुरी

    रूस के चीन के करीब जाने से यूरेशिया का शक्ति संतुलन बदल रहा है। इससे नए समीकरण बनने की संभावना है। इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र पर हो सकता है। दुनिया भर में विदेश नीति के कर्ता-धर्ताओं को इस स्थिति को अब अवश्य ध्यान में रखना होगा। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की इस हफ्ते हुई चीन यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में नया आयाम जुड़ने का ठोस संकेत दिया है। अब तक दोनों देशों की “असीम भागीदारी” में कम-से-कम घोषित तौर पर सुरक्षा का पहलू शामिल नहीं था। लेकिन लावरोव और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी...

  • निर्वाचन आयोग पर सवाल

    विपक्षी दायरे में आयोग की निष्पक्षता पर संदेह गहराता जा रहा है। आम चुनाव के दौर समय ऐसी धारणाएं लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। ऐसे में यह जिम्मेदारी आयोग पर है कि वह विपक्षी आरोपों या धारणाओं को बेबुनियाद साबित करे। राष्ट्रीय राजधानी में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के दफ्तर पर धरना दिया। वहां उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद एक सांसद ने आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष ढंग से काम नहीं कर रहा है। वह आम चुनाव में सभी दलों को समान धरातल मुहैया कराने का फर्ज नहीं निभा रहा...

  • विषमता की ऐसी खाई

    भारत में घरेलू कर्ज जीडीपी के 40 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है। यह नया रिकॉर्ड है। साथ ही यह अनुमान लगाया गया है कि आम घरों की बचत का स्तर जीडीपी के पांच प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। भारत के शेयर बाजार का मूल्य सोमवार को चार लाख करोड़ रुपए को पार कर गया। यह नया रिकॉर्ड है। मंगलवार सुबह अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपी। और उसी रोज यह खबर भी आई कि भारत में घरेलू कर्ज जीडीपी के 40 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है। यह भी नया रिकॉर्ड है। साथ ही...

  • इजराइल ने क्या पाया?

    हफ्ते भर पहले इजराइल ने सीरिया स्थित ईरानी दूतावास पर हमला कर उसके कई प्रमुख जनरलों को मार डाला। समझा जाता है कि यही घटना टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। विस्फोटक स्थिति के बीच आखिरकार अमेरिका को भी इजराइल पर दबाव बनाना पड़ा। इजराइल ने दक्षिण गजा से अपनी फौज लौटा ली है। साथ ही वह काहिरा में फिलस्तीनी संगठन हमास के साथ युद्धविराम की वार्ता में शामिल होने के लिए भी राजी हुआ है। ये घटनाक्रम हमास के हमले के बाद से इजराइल के जवाबी हमलों के ठीक छह महीना पूरा होने पर सामने आया। इस पूरे दौरान इजराइल हमास...

  • इस उदारता का राज़?

    देश में प्याज की कीमत नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगा रखी है। लेकिन इसी बीच खबर है कि यूएई के लिए निर्यात की इजाजत दे दी गई है, जिससे वहां के व्यापारी भारी मुनाफा कमा रहे हैँ।  इस खबर ने किसानों सहित अनेक लोगों को चौंकाया है कि प्याज के निर्यात पर जारी प्रतिबंध के बीच केंद्र सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रति रहस्यमय उदारता दिखाई है। सरकार ने यूएई के अनुरोध को अपवाद की श्रेणी में रखते हुए उसके लिए 24,400 मिट्रिक टन प्याज के निर्यात की इजाजत दी है। आश्चर्य...

  • कांग्रेस का ‘न्याय’ पत्र

    प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और रोजगार संबंधी कई बड़े वादे कांग्रेस ने किए हैं। मगर ये वादे तब अधिक विश्वसनीय बनते, अगर इनके साथ ही इन पर आने वाले खर्च और उसके लिए संसाधन जुटाने की योजना का विवरण भी पेश किया जाता। कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र को- जिसे उसने न्याय पत्र नाम दिया है- देश के लिबरल खेमे से खूब तारीफ मिली है। सामान्यतः मध्य वर्ग से आना वाला यह तबका नरेंद्र मोदी के शासनकाल में नागरिक स्वतंत्रताओं, अभिव्यक्ति की आजादी, और प्रगतिशील समझे जाने वाले एजेंडे पर हुए प्रहार से विचलित है। कांग्रेस ने इन मुद्दों पर मोदी काल...

  • अति-उत्साह में फजीहत

    आईएमएफ में भारत के प्रतिनिधि ने अपनी राय जताई। उनकी राय को आईएमएफ की भविष्यवाणी बता कर पेश करने का अति-उत्साह भारत में इतना अधिक दिखाया गया कि अंततः आईएमएफ को सार्वजनिक तौर पर स्पष्टीकरण देना पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को सफाई देने पड़ी है। कहा है कि उसकी तरफ से भारत के आठ प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर हासिल करने संबंधी कोई अनुमान नहीं लगाया गया है। कहानी यह है कि आईएमएफ में भारत के प्रतिनिधि कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम ने कहीं यह कहा कि भारत की जीडीपी आठ प्रतिशत की ऊंची दर से बढ़ने का अनुमान है। भारत...

  • इंसान की बढ़ी उम्र

    यह अवश्य अच्छी खबर है कि भारत में 1990-2021 की अवधि में जीवन प्रत्याशा में 7.9 वर्ष की वृद्धि हुई, जो विश्व औसत से अधिक है। लेकिन दक्षिण एशिया में भूटान, बांग्लादेश और नेपाल में लोगों की औसत उम्र भारत की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ी है। जीवन प्रत्याशा विकास मापने का सर्व-स्वीकृत पैमाना है। जन्म के समय एक शिशु के औसतन कितने वर्ष जीने की उम्मीद रहती है, यह इससे तय होता है कि संबंधित समाज में रोग की रोकथाम और इलाज के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा की कैसी व्यवस्थाएं हैं। बीसवीं सदी को मानव इतिहास में इसीलिए एक महत्त्वपूर्ण...

  • वीवीपैट की गिनती जरूरी

    यह अनिवार्य है कि निर्वाचन प्रक्रिया के किसी भी स्तर पर उठने वाले संदेहों का पूरा निवारण किया जाए। लोकतंत्र में यह विश्वास सबसे महत्त्वपूर्ण होता है कि चुनाव के जरिए वास्तविक जनमत की अभिव्यक्ति हुई है। तभी जनादेश सर्व-स्वीकृत बना रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने आश्वासन दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में दर्ज होने वाले वोट और उससे संबंधित वीवीपैट पर्चियों की पूरी गिनती की अर्जियों पर वह समय रहते अपना निर्णय देगा। लेकिन फिलहाल संकेत यह मिला है कि अदालत ने इस मसले को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी है। वरना, सुनवाई दो हफ्तों के लिए नहीं...

  • न्यायिक रुतबा बना रहे

    कानून के राज की रक्षा के लिए ही न्यायपालिका को अपनी अवमानना के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मिला होता है। जहां न्यायिक मानहानि का मामला स्पष्ट हो, उसमें न्यायपालिका को निश्चित रूप से अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। कानून के राज की व्यवस्था कायम रहने के लिए अनिवार्य होता है कि न्यायपालिका का रुतबा बना रहे। संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की व्याख्या और उस पर अमल को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी न्यायपालिका पर ही होती है। इसीलिए न्यायपालिका को अपनी अवमानना के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मिला होता है। जहां न्यायिक मानहानि का मामला स्पष्ट हो, उसमें...

  • एक गौरतलब चेतावनी

    आम चुनाव के दौर में अपेक्षा रहती है कि देश की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न राजनीतिक दल अपना कार्यक्रम सामने रखेंगे। यह तो निर्विवाद है कि इस समय बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन इसके समाधान पर सियासी दायरे में पूरी चुप्पी है। अब विश्व बैंक ने भारत को आगाह किया है। विषय वही है यानी रोजगार के अवसरों का अभाव- एक ऐसी सूरत जिसमें तेज आर्थिक वृद्धि दर के साथ-साथ उतनी ही तेजी से बेरोजगारी भी बढ़ती जा रही है। विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया के बारे में जारी अपने आकलन में भारत को चेतावनी दी...

  • संबंध में पड़े पेच

    ये घटनाक्रम इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिका से करीबी संबंध बनाने को अपनी विदेश नीति में केंद्रीय स्थान दे रखा है। आरंभिक सफलताओं के बाद अब ऐसा लगता है कि उसकी विदेश नीति का यह केंद्रीय स्थल दरकने लगा है।  खालिस्तानी उग्रवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के माले में नई दिल्ली स्थित अमेरिकी राजदूत एरिक गारसेटी का ताजा बयान भारत- अमेरिका संबंधों में पड़ रही गांठों का संकेत है। गारसेटी ने इस बार जैसी सख्त भाषा का इस्तेमाल किया, वैसा इस प्रकरण में अब तक सुनने को नहीं मिला था। गारसेटी ने आपसी संबंधों के बीच ‘लक्ष्मण...

  • चमक के नीचे अंधेरा?

    लग्जरी कारों, घड़ियों, जेवरात, मकान और विलासिता की अन्य वस्तुओं की बिक्री में बड़ा इजाफा हुआ है। इन सभी खरीब-बिक्रियों में ऊंचे स्तर पर जीएसटी देना पड़ता है। यह रकम सरकार की तिजोरी में पहुंचती है। जीएसटी की उगाही बढ़ने का यही राज़ है। वित्त वर्ष 2023-24 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की उगाही में उछाल आया। अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक जीएसटी के रूप में 20.18 लाख करोड़ रुपये की कुल उगाही हुई। वित्त वर्ष के आखिर महीने यानी बीते मार्च में उगाही में 18.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च में उगाही 1.65 लाख करोड़ रुपये रही।...

  • ये खेल हानिकारक है

    चुनावी होड़ के बीच विदेश संबंध से जुड़े मुद्दों को हवा देना उचित नहीं है। इस सिलसिले में जो कहा जाता है, उसका संदेश विदेश तक जाता है। इससे देश की नीति को लेकर अनिश्चय एवं संदेह पैदा होता है। चुनावी होड़ के बीच विदेश संबंध से जुड़े मुद्दों को हवा देना उचित नहीं है। इस सिलसिले में जो कहा जाता है, उसका संदेश विदेश तक जाता है। इससे देश की नीति को लेकर अनिश्चय एवं संदेह पैदा होता है। घरेलू राजनीति में फायदा उठाने के लिए विदेश संबंध से जुड़े मसले को मुद्दा बनाना राष्ट्र हित के लिहाज से...

  • मकसद की एकता बनी

    कहा जाता है कि ना से देर भली। इसलिए विपक्ष में बढ़े तालमेल का स्वागत किया जाएगा। इससे इतनी उम्मीद तो जगी ही है कि विपक्ष समर्थक मतदाता एक उद्देश्य बोध के साथ अब गोलबंद होंगे। नई दिल्ली में विपक्षी दलों की हुई बड़ी रैली का संदेश यह रहा कि आखिर इंडिया गठबंधन के अंदर उद्देश्य की एकता बनी है। मकसद का इजहार इस नारे में हुआ- अबकी बार, भाजपा तड़ीपार। कहा जा सकता है कि आम चुनाव से ठीक पहले केंद्र ने विपक्ष को अपंग बना देने के लिए जिस आक्रामक अंदाज में सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया है,...

  • दुनिया सब देखती है

    बुनियादी सवाल यह है कि आज दुनिया को भारत में लोकतंत्र की हालत पर चिंता जताने का मौका क्यों मिल रहा है? भारत ने दुनिया में अपना जो सॉफ्ट पॉवर बनाया था, आज वह अपनी साख क्यों खोने लगा है?  यह निर्विवाद है कि हर देश किसी दूसरे देश की अंदरूनी हालत के बारे में टिप्पणी अपने भू-राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर ही करता है। इसलिए बहुत-से मामलों पर बहुत-से देश चुप रहते हैं या मद्धम टिप्पणी करते हैँ। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता कि बाकी दुनिया किसी देश के अंदर क्या हो रहा है, उससे नावाकिफ रहती...

  • फिर किसके वश में?

    अगर देश की वित्त मंत्री और संपन्न पृष्ठभूमि से आने वाली सीतारमण चुनाव नहीं चुनाव लड़ने में सक्षम नहीं हैं, तो फिर श्रमिक वर्ग या मध्य वर्ग से आने वाला कोई व्यक्ति क्या निर्वाचित होने का सपना भी देख सकता है? Loksabha elections Nirmala Sitharaman वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस कथन ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं कि उनके पास चुनाव लड़ने के पैसे नहीं हैं। पहला और सबसे बड़ा प्रश्न तो यही उठा है कि क्या अब धनी होना चुनाव जीतने की अनिवार्य शर्त बन चुका है? अगर ये बात सच है तो क्या फिर भी भारत की...

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