Kumbh Special हरिद्वार में हर की पौड़ी का क्यों है महत्व,आइए जानें इसे ब्रह्मकुंड क्यों कहते हैं…..

New Delhi: इन दिनों पवित्र कुंभ में डुबकी लगाने के लिए हर कोई लालायित है। हालांकि कोविड के चलते सावधानियों की भी जरूरत है। हम आपको बता रहे हैं प्रसिद्ध हर की पौड़ी का महत्व। हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी  पर ब्रह्मकुंड को सबसे पवित्र स्थान माना गया है. ऐसी मान्यता है कि जब माता गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थी तो  ब्रह्माजी  ने यही पर उनका स्वागत किया था. ऐसा भी कहते है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश के लिए देव-दानवों के बीच हुई छीना-झपटी में पृथ्वी पर जिन चार स्थानों पर अमृत छलका, उनमें से एक हर की पौड़ी भी थी.  इसलिए यहां पर 12 साल में एक बार लगने वाले कुंभ मेले का आयोजन भी होता है. यहां पर आने वाले श्रद्धालु चाहते हैं कि वे एक बार हर की पौड़ी  पर स्नान अवश्य करें. हर की पौड़ी का निर्माण किसने करवाया हर की पौड़ी या ब्रह्मकुंड धर्मनगरी का मुख्य घाट है. इस घाट का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भर्तृहरि की याद में करवाया था. भर्तृहरि ने यहीं गंगा के तट पर तपस्या करके अमर पद पाया था. राजा विक्रमादित्य ने भर्तृहरि की याद में पहले यह कुंड और फिर पौड़ी … Continue reading Kumbh Special हरिद्वार में हर की पौड़ी का क्यों है महत्व,आइए जानें इसे ब्रह्मकुंड क्यों कहते हैं…..

‘मशरिक़ी हूर’ पारसी रंगमंच से रूबरू

मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय में नाटक ‘मशरिक़ी हूर’ देखते हुए ऐसा लग रहा था मानो छत्तीसगढ़ लोकनाट्य या हबीब तनवीर साहब की कोई प्रस्तुति देख रहा हूँ

राजस्थान में प्रकृति ने दिखाई अपनी ताकत

ऋषिराज इधर पूरा देश कोरोना वायरस से बचने के तरीके खोज रहा था, उधर राजस्थान में धीरे से घनी काली घटाओं ने आसमान को घेर लिया। 2 बजे से ही आसमान से सूचना मिल रही थी कि कुछ अप्रत्याशित होने वाला है, लेकिन आजकल ज्यादातर लोग मोबाइल से सूचनाएं ग्रहण करते हैं और मोबाइल की स्क्रीन देखते रहते हैं। आसपास के वातावरण, धरती, हवा, पानी आदि की तरफ ध्यान देने का सिलसिला बहुत ही कम हो गया है। मनुष्य जितना अपने में मगरूर रह सकता है, उसे उतना मगरूर करने के वैज्ञानिक प्रयास सदियों से चले आ रहे हैं। लोग सृष्टि की तरफ ध्यान न दें और वही करते रहें, जो उन्हें परंपरागत रूप से सिखाया गया है, या नए तरीकों से सिखाया जा रहा है। बड़ी बड़ी ताकतें मनुष्य को इस स्थिति में बनाए रखने के प्रयास में जुटी रहती हैं। तो वह गुरुवार 5 मार्च 2020 की तारीख थी, जब सुबह सूरज रोज की तरह चमका था। धूप खिली थी। थोड़ी ठंडक थी। बंगलों के लान शानदार हरे-भरे थे। उनमें फूल खिलखिला रहे थे। खेतों में गेहूं, सरसों की फसलें लहलहा रही थी। सब्जियों की फसलें खुशहाली की सूचना दे रही थी। लोग चर्चा कर रहे थे कि… Continue reading राजस्थान में प्रकृति ने दिखाई अपनी ताकत

मंजिल की तलाश  में ये होनहार

निचले स्तर से उठ कर विश्व क्रिकेट में हालांकि कुछेक खिलाड़ियों ने धमक जमाई है लेकिन छोटी उम्र में अपनी प्रतिभा की झलक दिखाने वाले कुछ ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो सही मंजिल की तलाश में है। तीन साल पहले विश्व क्रिकेट इतिहास में पहली बार एक हजार रन से ज्यादा की पारी खेल कर प्रणव धनावड़े अपने पिता प्रशांत के ऑटो रिक्शा में बैठकर मुंबई के उपनगर कल्याण की रामबाग चॉल के अपने घर चले गए।

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