‘मशरिक़ी हूर’ पारसी रंगमंच से रूबरू

मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय में नाटक ‘मशरिक़ी हूर’ देखते हुए ऐसा लग रहा था मानो छत्तीसगढ़ लोकनाट्य या हबीब तनवीर साहब की कोई प्रस्तुति देख रहा हूँ

राजस्थान में प्रकृति ने दिखाई अपनी ताकत

ऋषिराज इधर पूरा देश कोरोना वायरस से बचने के तरीके खोज रहा था, उधर राजस्थान में धीरे से घनी काली घटाओं ने आसमान को घेर लिया। 2 बजे से ही आसमान से सूचना मिल रही थी कि कुछ अप्रत्याशित होने वाला है, लेकिन आजकल ज्यादातर लोग मोबाइल से सूचनाएं ग्रहण करते हैं और मोबाइल की स्क्रीन देखते रहते हैं। आसपास के वातावरण, धरती, हवा, पानी आदि की तरफ ध्यान देने का सिलसिला बहुत ही कम हो गया है। मनुष्य जितना अपने में मगरूर रह सकता है, उसे उतना मगरूर करने के वैज्ञानिक प्रयास सदियों से चले आ रहे हैं। लोग सृष्टि की तरफ ध्यान न दें और वही करते रहें, जो उन्हें परंपरागत रूप से सिखाया गया है, या नए तरीकों से सिखाया जा रहा है। बड़ी बड़ी ताकतें मनुष्य को इस स्थिति में बनाए रखने के प्रयास में जुटी रहती हैं। तो वह गुरुवार 5 मार्च 2020 की तारीख थी, जब सुबह सूरज रोज की तरह चमका था। धूप खिली थी। थोड़ी ठंडक थी। बंगलों के लान शानदार हरे-भरे थे। उनमें फूल खिलखिला रहे थे। खेतों में गेहूं, सरसों की फसलें लहलहा रही थी। सब्जियों की फसलें खुशहाली की सूचना दे रही थी। लोग चर्चा कर रहे थे कि… Continue reading राजस्थान में प्रकृति ने दिखाई अपनी ताकत

मंजिल की तलाश  में ये होनहार

निचले स्तर से उठ कर विश्व क्रिकेट में हालांकि कुछेक खिलाड़ियों ने धमक जमाई है लेकिन छोटी उम्र में अपनी प्रतिभा की झलक दिखाने वाले कुछ ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो सही मंजिल की तलाश में है। तीन साल पहले विश्व क्रिकेट इतिहास में पहली बार एक हजार रन से ज्यादा की पारी खेल कर प्रणव धनावड़े अपने पिता प्रशांत के ऑटो रिक्शा में बैठकर मुंबई के उपनगर कल्याण की रामबाग चॉल के अपने घर चले गए।

पटाखे जलाते वक्त रखें आंखों का ख्याल

दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। दिवाली का त्योहार प्रकाश और उजाले का प्रतीक माना जाता है। इसे बड़ी ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिवाली वैसे पांच दिनों का त्योहार माना जाता है। ये कार्तिक महीने के पंद्रहवें दिन से शुरु होता है। दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है।

चीन दुश्मन है या प्रतिस्पर्धी?

हमें चीन की ओर से प्रत्येक खतरे के प्रति सजग और सचेत रहने की आवश्यकता है। परंतु सच यह भी देश में वामपंथी विचार से प्रभावित होकर हमनें अपनी कर्मशक्ति का ही ह्रास किया है। ……क्या यह सत्य नहीं कि चीन आयातित वस्तुओं की हमारे द्वारा खरीदारी से चीन में नौकरियां पैदा होती है? इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि संपन्नता भी वही है। क्यों नहीं हम प्रतिस्पर्धा के युग में चीन के समक्ष टिक नहीं पाते? क्या हम सभी को इस पर आत्मचिंतन करने की आवश्यकता नहीं?

दुनिया में सब तरफ परिवारवाद

तानाशाही और राजशाही वाली व्यवस्था में तो खैर पीढ़ी दर पीढ़ी सत्ता सुख भोगने का रिवाज रहा है, लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देशों में भी परिवारवाद समय समय पर रंग दिखाता रहा है।

भ्रामक प्रचार पर अंकुश कैसे लगे!

विकसित देशों में ऐसा नहीं होता। मैगी की नौ किस्में बनाने वाली स्विटजरलैंड की कंपनी नेस्ले कई दशक पहले धुंआधार प्रचार के जरिए बच्चों के लिए स्वास्थ्य के कथित रूप से बेहतर विकल्प के तौर पर विकासशील देशों के बाजारों में दूध उतारा था।

सेलिब्रिटी की जरूरत बनते विज्ञापन

फि ल्मी सितारें हो या क्रिकेटर अथवा किसी अन्य खेल की विशिष्ट हस्ती, विज्ञापनों में चेहरा दिखाना सभी की अनिवार्य जरूरत बन गया है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इससे प्रतिष्ठा व लोकप्रियता बढ़ती है बल्कि इसलिए कि अपने मूल कर्म क्षेत्र में खासी मशक्कत करने के बाद जो रकम मिल पाती है उससे कहीं ज्यादा विज्ञापनों में हिस्सा बनने से हंसते खेलते जेब में आ जाती है। महेंद्र सिंह धोनी को ही आम्रपाली के ब्रांड एंबेसडर होने के नाते हर एनडोर्समेंट के लिए आठ करोड़ रुपए मिल रहे थे।

सेलिब्रिटी से क्यों पसंद-नापसंद तय हो?

किस आरो से साफ हुआ कौन सा पानी पीना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है? किस क्रीम से काला रंग जल्दी गोरा हो सकता है? कौन सा पेस्ट शुद्धता की गारंटी देता है? बच्चों का उचित विकास किस पेय से हो सकता है? सवालों की लिस्ट काफी लंबी है मसलन किस साबुन से हाथ धोना चाहिए, क्या पहनना चाहिए, क्या और कैसे खाना चाहिए वगैरह वगैरह।

और लोड करें