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युवा असंतोष का इज़हार

लोकतांत्रिक समाजों में काउंटर कल्चर आंदोलनों की रही प्रभावशाली भूमिका को देखते हुए कॉकरोच केंद्रित चर्चा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। असंतुष्ट नौजवान अक्सर उलटबासियों का सहारा लेते हैं।

कॉकरोच वाली टिप्पणी पर जैसी प्रतिक्रिया हुई है, वह खासकर युवा वर्ग में गहराते असंतोष और उनमें फैल रही बेचैनी का संकेत है। युवाओं के बहुत हिस्से को संभवतः यह अहसास हुआ कि उनकी स्थिति को सचमुच कॉकरोच जैसा बना दिया गया है। इसलिए जगह-जगह पर खुद को कॉकरोच बताते हुए विरोध जताने की अनपेक्षित घटनाएं हुई हैं। मसलन, लखनऊ में बेरोजगार नौजवान सड़क पर सचमुच कॉकरोच की तरह रेंगते हुए शिक्षा मंत्री के दफ्तर की ओर विरोध जताने जाते देखे गए। दिल्ली में ‘मैं कॉकरोच हूं’ की तख्तियां लगाए नौजवान यमुना की सफाई करने गए। और कुछ नौजवानों ने तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक ऑनलाइन दल की ही शुरुआत कर दी है।

बताया जाता है कि दो दिन के अंदर 50 हजार से ज्यादा नौजवानों ने इस पार्टी ऑनलाइन सदस्यता ले ली। इस पार्टी ने अपना प्रतीक चिह्न और अपने मकसद को बताते हुए एक गाने का वीडियो जारी किया, तो वो वायरल हो गया। अब इस पार्टी ने जेनरेशन- जेड के नौजवानों का ऑनलाइन राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का इरादा जताया है। पार्टी का घोषणापत्र उन मुद्दों से भरा पड़ा है, जिनसे आज के नौजवान व्यग्र दिखते हैँ। मसलन, दल-बदल करने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर 20 साल की रोक, ‘गोदी मीडिया’ के एंकरों के बैंक खातों की जांच, एक भी वैध मतदाता का नाम कटने पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त की यूएपीए के तहत गिरफ्तारी, प्रधान न्यायाधीश पद से रिटायर जजों के राज्यसभा में नामांकन पर रोक आदि जैसे वादे इसका हिस्सा हैं।

बेशक, ये पहल एक तरह का व्यंग्य है, लेकिन लोकतांत्रिक देशों में काउंटर कल्चर आंदोलनों की रही प्रभावशाली भूमिका को देखते हुए इसके महत्त्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अलग-अलग दौर में अवसरहीनता एवं अंधकारमय भविष्य से जूझ रहे नौजवान व्यंग्य और उलटबासियों का सहारा लेते रहे हैं। इनके जरिए वे व्यवस्था के प्रति अपनी नाराजगी का इजहार करते हैँ। आज जब सोशल मीडिया वैचारिक एवं राजनीतिक संघर्ष का रण-क्षेत्र बना हुआ है, इस तरह की अभिव्यक्तियों का प्रभाव और दूरगामी हो गया है। शासक समूहों को इसमें छिपे संदेशों को अवश्य समझना चाहिए।

By NI Editorial

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