राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

यह मौद्रिक मामला नहीं

ताजा महंगाई को मौद्रिक नीति संबंधी चर्चा में सीमित करना गलत निदान होगा। तमाम संभव क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाने और मुनाफा की प्रवृत्ति पर लगाम लगाते हुए ही फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती है।

जब कभी मुद्रास्फीति दर ऊंची होती है, तो मीडिया में ब्याज दर बढ़ने का अंदाजा लगाया जाने लगता है। थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के ताजा आंकड़ों के बाद फिर ऐसा हो रहा है, तो उसमें हैरत की कोई बात नहीं है। मगर यह चर्चा अप्रसांगिक है। इसलिए कि हालिया महंगाई मौद्रिक नीतियों का नतीजा नहीं है। बल्कि इसके कारण ढांचागत हैं। ऐसे में ब्याज दर बढ़ा कर बाजार में मुद्रा की उपलब्धता घटाते हुए इस पर नियंत्रण कायम करने का तरीका कारगर नहीं होगा। दरअसल, कोरोना काल के बाद से तमाम बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ये तरीका अप्रभावी साबित हुआ है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक में 9.92 और खुदरा मूल्य सूचकांक में 4.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

थोक सूचकांक पांच महीनों से दस फीसदी के आसपास रहा है। इसे देखते हुए निकट भविष्य में खुदरा महंगाई से राहत मिलने की गुंजाइश नहीं है। इस महंगाई की दो मुख्य वजहें हैं- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत का लगातार ऊंचा बने रहना, और कमजोर मानसून के कारण कृषि पैदावार का दबाव में होना। गौरतलब है कि अगस्त में खाद्य महंगाई 5.95 फीसदी रही। स्पष्टतः महंगाई की वजह मांग की तुलना में चीजों की पर्याप्त आपूर्ति ना हो पाना है। ऐसी स्थितियों का लाभ उत्पादक और विक्रेता भी उठाते हैं, जो आपूर्ति में वास्तविक अभाव की तुलना में अधिक मूल्य-वृद्धि कर अपना मुनाफा बढ़ाते हैं। जिन क्षेत्रों में मोनोपॉली हो, उनमें ऐसा अधिक होता है।

अतः ताजा महंगाई को मौद्रिक नीति संबंधी चर्चा में सीमित करना गलत निदान होगा। दरअसल, इस परिस्थिति में सिर्फ तमाम संभव क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाने और उत्पादकों एवं बिचौलियों के मुनाफा बढ़ाने की प्रवृत्ति पर ठोस लगाम लगाते हुए ही आम उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती है। वरना, महंगाई के कारण कामकाजी समूहों की वास्तविक आय में गिरावट का पहले से जारी रुझान और तेज हो जाएगा। उसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। बहरहाल, सरकार के कर्ताधर्ता आंकड़ा मैनेजमेंट से बनावटी सुखबोध पैदा करने के अपने भ्रम से निकलें, तभी उन्हें ठोस कदम की जरूरत का अहसास होगा।

Tags :

By NI Editorial

The Nayaindia editorial desk offers a platform for thought-provoking opinions, featuring news and articles rooted in the unique perspectives of its authors.

Leave a comment