प्रसिद्ध हास्य अभिनेता गोवर्धन असरानी का सोमवार शाम को निधन हो गया। उन्होंने 84 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। उनका अंतिम संस्कार भी शाम को सांताक्रूज श्मशान घाट पर किया गया। इस मौके पर परिजन और करीबी लोग ही मौजूद थे।
जानकारी सामने आई कि गोवर्धन असरानी की सेहत ठीक नहीं थी। वे पिछले करीब पांच दिन से अस्पताल में थे और सोमवार शाम को जुहू के आरोग्य निधि अस्पताल में उनका निधन हो गया।
असरानी भारतीय सिनेमा के सबसे लंबे समय तक सक्रिय हास्य कलाकारों में से एक थे। पांच दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने 350 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई), पुणे से एक्टिंग सीखी और अपने हुनर को निखारा। इसके बाद उन्होंने 1960 के दशक के मध्य में हिंदी फिल्म जगत में प्रवेश किया।
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हालांकि, उन्होंने गंभीर और सहायक भूमिकाओं से शुरुआत की, लेकिन असरानी की हास्य प्रतिभा जल्द ही उभरकर सामने आई। 1970 और 1980 के दशक में वह हिंदी सिनेमा का एक प्रमुख चेहरा बन गए, जहां उन्होंने अक्सर प्यारे मूर्ख, परेशान क्लर्क या मजाकिया सहायक की भूमिकाएं निभाईं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और चेहरे के भाव उन्हें फिल्मों में निर्देशकों का पसंदीदा कलाकार बनाते थे।
उन्होंने ‘शोले’ और ‘चुपके चुपके’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। फिल्म ‘शोले’ में उन्होंने शानदार अभिनय किया था, जिसमें वे एक हिटलर की नकल करने वाले जेलर की भूमिका में थे।
असरानी ने गुजराती और राजस्थानी समेत कई अलग-अलग भाषाओं में काम किया। उन्होंने कुछ हिंदी और गुजराती फिल्मों का निर्देशन भी किया। उन्होंने महमूद, राजेश खन्ना और बाद में गोविंदा जैसे अभिनेताओं के साथ बेहतरीन कॉमेडी रोल निभाए।
कॉमेडी के अलावा असरानी ने ‘आज की ताजा खबर’ और ‘चला मुरारी हीरो बनने’ जैसी फिल्मों में अपनी नाटकीय प्रतिभा भी दिखाई।
Pic Credit : ANI
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