बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 11 जिलों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, वहीं भारी बारिश के बीच शनिवार सुबह पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर ‘उच्चतम बाढ़ स्तर’ को पार कर गया। आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंत्रियों और अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने तथा राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करने को कहा गया है, क्योंकि गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
जल संसाधन विभाग के बुलेटिन के अनुसार, शनिवार सुबह 10 बजे गंगा उच्चतम बाढ़ स्तर से एक सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, जिससे राजधानी के निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। लोगों से नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बुलेटिन के अनुसार, बिहार में कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक, बलतारा में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन तथा दरौली में घाघरा नदी शामिल हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के बुलेटिन के अनुसार, कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण 11 जिलों के 50 प्रखंडों और 201 ग्राम पंचायतों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया शामिल हैं।
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जल संसाधन विभाग ने बताया कि पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर शनिवार सुबह 10 बजे 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले चार घंटे में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि है और यह उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर से एक सेंटीमीटर अधिक है। इससे पहले यह स्तर 21 अगस्त 2016 को दर्ज किया गया था।
विभाग ने अनुमान जताया है कि गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर रविवार सुबह आठ बजे तक बढ़कर 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पटना के पंडारक में भी गंगा का जलस्तर शनिवार सुबह 10 बजे 43.78 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर 43.73 मीटर था, जो 16 अगस्त 2021 को दर्ज किया गया था।
विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को एहतियाती कदम उठाने, तटबंधों के नदी की ओर रहने वाले लोगों को सतर्क करने और बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष दलों की लगातार गश्त सुनिश्चित करने को कहा है।
राज्य और पड़ोसी नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बिहार में सितंबर में अब तक 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 38 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।
अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 12,300 पॉलीथीन शीट और 2,250 सूखा राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। लोगों की निकासी और आवागमन के लिए 858 नावें संचालित की जा रही हैं।
इसके अलावा बाढ़ प्रभावित जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 27 टीम और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के सात दल तैनात किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने तथा आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
पटना में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री स्थिति पर नजर रख रहे हैं। सरकार पूरी तरह से हालात से अवगत है। सभी यह प्रयास कर रहे हैं कि इस आपदा के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। नेपाल में आई आपदा और लगातार बारिश के बाद से ये हालात हैं।
Pic Credit : ANI
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