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उच्च न्यायालय ने ओबेरॉय रियल्टी की गुरुग्राम परियोजना में नए आवंटन पर लगाई रोक

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने ओबेरॉय रियल्टी कंपनी को गुरुग्राम स्थित उसकी आवासीय परियोजना ‘ओबेरॉय 360 नॉर्थ’ में कोई नया आवंटन करने या किसी तीसरे पक्ष के लिए अधिकार सृजित करने से तब तक के लिए रोक दिया है जब तक कि हरियाणा का नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (डीटीसीपी) परियोजना के लाइसेंस की वैधता को चुनौती देने वाली लंबित शिकायत पर फैसला नहीं कर देता।

शिकायत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) संबंधी नियमों और अन्य प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। ‘ओबेरॉय 360 नॉर्थ’ गुरुग्राम में ओबेरॉय रियल्टी कंपनी की पहली आवासीय परियोजना है।

यह आदेश न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने ‘एडवांस इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड’ (एआईपीएल) की ओर से हरियाणा के डीटीसीपी निदेशक और अन्य के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

एआईपीएल ने 12 मई 2025 को जारी लाइसेंस संख्या-69 और 17 जून 2025 के उस आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया है, जिसके तहत विकास लाइसेंस को दूसरे डेवलपर के नाम हस्तांतरण करने की मंजूरी दी गई थी।

कंपनी ने परियोजना पर अपना अधिकार जताते हुए ओबेरॉय रियल्टी के पक्ष में बिक्री विलेख (सेल डीड) को भी रद्द करने का अनुरोध किया है।

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अदालत के आदेश के अनुसार, विवाद गुरुग्राम के सेक्टर-58 स्थित 14.816 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जहां वाणिज्यिक परिसर के साथ एक आवासीय कॉलोनी विकसित की जानी है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि लाइसेंस जारी करने और बाद में उसका हस्तांतरण हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 के प्रावधानों के विपरीत था तथा यह प्रक्रिया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) संबंधी नियमों का उल्लंघन है।

हालांकि, खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं और उसने इनके गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि परियोजना की अनुमानित लागत 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये है और इसे कई चरणों में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अब तक करीब 350 आवासीय इकाइयों का आवंटन किया जा चुका है और खरीदारों से लगभग 750 करोड़ रुपये प्राप्त किए जा चुके हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि लाइसेंस विवाद का निपटारा होने से पहले बिक्री जारी रहने से संभावित खरीदारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि 1975 के अधिनियम की धारा 8 के तहत लाइसेंस रद्द करने संबंधी याचिकाकर्ता का आवेदन डीटीसीपी निदेशक के समक्ष लंबित है और इस मामले की सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित है।

राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।

Pic Credit : ANI

By Naya India

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