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महाराष्ट्र

एनसीपी अब अजित पवार की

ByNI Desk,
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नई दिल्ली। शिव सेना के बाद अब एनसीपी के मामले में चुनाव आयोग का फैसला आया है। आयोग ने कहा है कि असली एनसीपी अजित पवार की है। चुनाव आयोग ने पार्टी के संस्थापक शरद पवार गुट की अपील खारिज कर दी है और उनके भतीजे अजित पवार को एनसीपी का नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। इससे पहले चुनाव आयोग ने शिव सेना के मामले में भी ऐसा ही फैसला किया था। पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे की बजाय आयोग ने उनसे अलग होकर भाजपा के साथ गए एकनाथ शिंदे गुट को असली शिव सेना माना था। उसी तरह शरद पवार से अलग होकर भाजपा के साथ गए अजित पवार गुट को असली एनसीपी माना गया है।

चुनाव आयोग ने मंगलवार को कहा कि अजित पवार गुट ही असली एनसीपी है। इसके बाद आयोग ने शरद पवार को नए राजनीतिक दल के लिए तीन नाम देने को कहा है। इसके लिए शरद को सात फरवरी की दोपहर तीन बजे तक का समय दिया है। गौरतलब है कि दो जुलाई 2023 को अजित पवार एनसीपी के आठ विधायकों के साथ महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे। बाद में उन्होंने अपने साथ एनसीपी के 40 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया था।

शरद पवार के खिलाफ बगावत करके भाजपा समर्थित शिंदे सरकार में उप मुख्यमंत्री बनने के बाद अजित पवार ने दावा किया था कि एनसीपी का बहुमत उनके पास है। इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर उनका अधिकार है। उन्होंने 30 जून को चुनाव आयोग में याचिका दायर कर एनसीपी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा किया था और चुनाव आयोग के सामने नौ हजार से ज्यादा दस्तावेज पेश किए थे। दूसरी ओर शरद पवार ने पार्टी छोड़ कर जाने और शिंदे सरकार में मंत्री बनने वाले नौ विधायकों सहित 31 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी।

शरद पवार से बागी होने के बाद अजित पवार ने एनसीपी के 40 विधायकों के समर्थन का दावा किया था और अपने को पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया था। उनके दावे को शरद पवार गुट ने चुनौती दी थी और उनकी ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों में कई तरह की कमियां भी निकाली थी लेकिन ऐसा लग रहा है कि शरद पवार को अंदाजा था कि चुनाव आयोग का फैसला क्या होगा तभी उन्होंने कई महीने पहले ही कहा था कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह से कोई नेता नहीं बन जाता है। गौरतलब है कि शिव सेना के उद्धव ठाकरे गुट को भी नया नाम और चुनाव चिन्ह मिला है।

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