उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्य समिति से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस सूत्रों ने शनिवार को बताया कि श्री रावत ने स्वयं कार्य समिति से इस्तीफा देने की पेशकश की है और अपना त्यागपत्र कांग्रेस आलाकमान को भेज दिया है।
अब यह आलाकमान पर निर्भर है कि वह उनका इस्तीफा स्वीकार करता है या नहीं। सूत्रों के अनुसार, श्री रावत ने यह कदम देहरादून में उनके पूर्व ओएसडी के ठिकानों पर छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरों के बीच उठाया है। श्री रावत ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में उनके ओएसडी के पास भारी मात्रा में नकदी और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई है। इस तथ्य का खुलासा आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं। मैं पार्टी या सरकार में जिन भी पदों पर रहा हूं। श्री जीना महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि श्री जीना एक बेहद सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं। यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ और इस तरह की कोई गलती उन्होंने की है तथा उसके प्रमाण हैं, तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए वह लज्जित हैं लेकिन उन्हें इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है। श्री रावत ने कहा कि उत्तराखंड के चुनाव में भारी दांव लगा हुआ है और वह मजाक में कहा करते थे कि चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देने आएगी। इस बार उनके घर पर नहीं, बल्कि उनके एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नैरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं तथा पार्टी नेता राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में उनके किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे।
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उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने इष्ट देवता का स्मरण करके यह निर्णय लिया है कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटना चाहते हैं, ताकि पार्टी के संघर्ष में उनकी वजह से कोई कमजोरी न आए। उन्होंने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका गठन राज्य के नौजवानों के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनके अनुसार, उनके तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। श्री रावत ने कहा कि यदि नियुक्तियों और परीक्षाओं की प्रक्रिया के दौरान उनसे कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है तो वह उत्तराखंड के लोगों से क्षमा मांगते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास नियुक्तियों के मामले में उनकी संलिप्तता के कोई प्रमाण हैं तो उन्हें सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और यदि उनसे जाने-अनजाने में ऐसा कोई कृत्य हुआ है जिससे राज्य के नौजवानों के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है तो वह स्वयं को दंड का पात्र मानते हैं तथा कानून को उन्हें दंडित करना चाहिए।
Pic Credit : ANI
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