nayaindia Sameer Khakhar 'नुक्कड़’ के ‘खोपड़ी’ समीर खाखर का 71 साल की उम्र में निधन
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‘नुक्कड़’ के ‘खोपड़ी’ समीर खाखर का 71 साल की उम्र में निधन

ByNI Desk,
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मुंबई। अस्सी के दशक के लोकप्रिय धारावाहिक ‘नुक्कड़’ (Nukkad) में ‘खोपड़ी’ (Khopdi) का यादगार किरदार निभाने वाले अभिनेता समीर खाखर (Sameer Khakhar) का बुधवार तड़के मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 71 साल के थे।

खाखर के ज्यादातर अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनके भाई गणेश खाखर ने बताया कि समीर खाखर को मंगलवार सुबह सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद मुंबई के उपनगर बोरीवली स्थित एमएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

गणेश खाखर ने कहा, उन्हें (समीर खाखर को) मंगलवार से सांस लेने में समस्या थी और बाद में वह बेसुध हो गए, इसलिए हमने डॉक्टर को घर पर बुलाया था। डॉक्टर ने हमें उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा। उन्हें एमएम अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। गणेश खाखर ने बताया, धीरे-धीरे उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। वह होश में ही नहीं आए। आज तड़के साढ़े चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

समीर खाखर का उनके परिवार और गुजराती थिएटर में अभिनय के दिनों के कुछ दोस्तों की मौजूदगी में बोरीवली श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। उनके परिवार में उनकी पत्नी हैं। समीर खाखर हाल ही में प्राइम वीडियो पर प्रसारित वेब सीरीज ‘फर्जी’ में नजर आए थे। 1990 के दशक में वह अभिनय छोड़ सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए अमेरिका चले गए थे। उन्हें ‘नुक्कड़’ के अलावा ‘सर्कस’ और ‘श्रीमान श्रीमती’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में निभाए दमदार किरदारों के लिए जाना जाता था।

समीर खाखर ने ‘परिंदा’, ‘जय हो’ और ‘हंसी तो फंसी’ जैसी फिल्मों तथा ‘सीरियस मेन’ और ‘सनफ्लावर’ जैसे वेब सीरीज में भी कुछ भूमिकाएं अदा की थीं। फिल्मकार हंसल मेहता ने ‘खोपड़ी’ के रूप में लोगों के दिलों को छूने के लिए समीर खाखर का आभार जताया।

उन्होंने ट्विटर पर अभिनेता की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, मुझे कॉलेज में कुछ वजहों से ‘नुक्कड़’ में निभाए उनके यादगार किरदार के नाम पर ‘खोपड़ी’ नाम दिया गया था। उस समय के मेरे सबसे करीबी दोस्त मुझे आज भी खोपड़ी बुलाते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि ‘ओरिजिनल’ (असल खोपड़ी) को अलविदा कहने का समय आ गया है। अलविदा समीर खाखर। खूबसूरत यादें देने और हमारे दिलों को छूने के लिए आपका शुक्रिया।

निर्देशक नीला माधव पांडा ने ट्वीट किया, खोपड़ी इस सर्कस को छोड़कर आकाश के नुक्कड़ में चला गया है। उन्होंने आगे लिखा, अलविदा समीर खाखर। उन सभी खूबसूरत यादों के लिए आपका शुक्रिया। आपके किरदार हमेशा हमारे बीच रहेंगे। ओम शांति।

समीर खाखर 2021 की शुरुआत में उस समय सुर्खियों में आए थे, जब एक फिल्म पत्रकार ने ट्वीट कर फिल्म उद्योग के लोगों को बताया था कि वह काम की तलाश में हैं। इस ट्वीट ने सतीश शाह और गुलशन देवैया सहित अन्य फिल्मी हस्तियों का ध्यान खींचा था।

अभिनेता ने जनवरी 2021 में कहा था, हर कोई काम की तलाश में है और मैं भी। और काम की तलाश से मेरा मतलब नौकरी के लिए संपर्क और आवेदन करना है। अभिनेताओं के मामले में, यह एक-एक फिल्म या शो के लिए किया जाने वाला दैनिक अभ्यास है। हालांकि, मैं एक बुरा ‘सेल्समैन’ हूं। उन्होंने कहा था, मुझे उम्मीद है कि जो लोग मुझे जानते हैं, वे मुझे काम जरूर देंगे। मैं अपनी आखिरी सांस तक काम करते रहना चाहूंगा। मैं ताउम्र लोगों का मनोरंजन करना चाहता हूं। मैं अभी भी थका नहीं हूं।

समीर खाखर को भले ही कुंदन शाह और सईद अख्तर मिर्जा निर्मित ‘नुक्कड़’ में निभाए मस्तमौला शराबी ‘खोपड़ी’ के किरदार से लोकप्रियता मिली हो, लेकिन उन्हें एक ही तरह के किरदारों में बंधना पसंद नहीं था।

1990 के दशक में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के लिए अमेरिका का रुख करने के अपने फैसले के बारे में समीर खाखर ने कहा था, मैंने कई फिल्मों को न कहा, क्योंकि मैं हर बार एक ही तरह के किरदार नहीं निभाना चाहता था। बदलाव ही संसार का स्थाई नियम है और हमें इसके अनुसार ढलना ही होगा। आप यह नहीं सकते कि मैं केवल फिल्में या टीवी धारावाहिक या फिर इसी तरह की भूमिकाएं करूंगा। समीर खाखर 2008 में वैश्विक आर्थिक मंदी आने तक अमेरिकी की एक आईटी कंपनी में जावा डेवलपर के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में शाह और मिर्जा से इत्तफाकन हुई मुलाकात में खोपड़ी का किरदार मिलने की कहानी भी बयां की थी।

समीर खाखर ने बताया था, उन्हें (निर्माताओं को) लगा कि धारावाहिक में इस किरदार का अधिक इस्तेमाल किया जा सकेगा और कड़ियों की संख्या बढ़ती गई। मुझे इस किरदार के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह लगी कि शराबी होने के बावजूद खोपड़ी तर्कसंगत था। उन्होंने कहा था, हम सबने इस किरदार को गढ़ने का काम किया। सईद साहब ने मुझसे कहा कि खोपड़ी शहर का भटका हुआ मासूम युवक है। इस वाक्य ने मेरे अंदर कई भावनाएं पैदा कीं। मैं इस किरदार की मानसिकता को समझने की कोशिशों के चलते कई रातों तक सो नहीं पाया। (भाषा)

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