योग सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। इन्हीं में से एक मत्सायन एक ऐसा योगासन है, जो पेट की चर्बी कम करने और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मददगार होता है।
मत्सयासन दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘मत्स्य’, जिसका अर्थ है ‘मछली’, और ‘आसन’, जिसका अर्थ है ‘मुद्रा’। यह एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर का आकार मछली की भांति नजर आता है, इसलिए इसे मत्स्यासन कहा जाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इसे महत्वपूर्ण योगासन की श्रेणी में रखा है। उनके अनुसार, यह योगासन करने से छाती, गर्दन और पेट संबंधी स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है। यह आसन फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है।
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शुरुआती अभ्यासकर्ता इसे विशेषज्ञ की देखरेख पर ही करें। इसे करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं। पैर सीधे रखें और अपने हाथों को कूल्हों के नीचे रखें और हथेलियां नीचे की ओर ले जाएं। कोहनियों से सहारा लेकर सांस भरते हुए छाती और सिर को ऊपर उठाएं। सिर के पिछले हिस्से को जमीन पर टिकाएं, लेकिन वजन कोहनियों पर रखें (गर्दन पर दबाव न डालें)। अपनी क्षमता अनुसार कुछ सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें, गहरी सांस लें। सामान्य स्थिति में लौटें। शुरुआत में 3-5 बार दोहराएं।
शुरु में इसे 10-15 सेकंड तक ही करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं, जिससे शरीर को आराम मिलेगा। मत्स्यासन को सूर्य नमस्कार या अन्य आसनों के साथ मिलाकर अभ्यास करने से इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। सुबह के समय खाली पेट इस आसन का अभ्यास सबसे अच्छा माना जाता है। यदि आप रोजाना सिर्फ 5-10 मिनट भी मत्स्यासन का अभ्यास करेंगे, तो आपका शरीर स्वस्थ, लचीला और ऊर्जावान होगा।
गर्दन या पीठ की गंभीर समस्या वाले लोग बिना डॉक्टर या योग गुरु की सलाह के यह आसन न करें। हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति सावधानी बरतें। वहीं, गर्भावस्था में इस आसन से बचना चाहिए।
Pic Credit : ANI
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