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यूजीसी नियमों पर बनेगी कमेटी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के मकसद से जो दिशानिर्देश जारी किए थे, उन पर नए सिरे से विचार के लिए एक कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, पांच नवंबर को सुनवाई में सरकार ने कहा कि यूजीसी ने इस साल जनवरी में जो दिशानिर्देश जारी किए हैं उन पर पुनर्विचार होगा और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी के साथ भेदभाव न हो।

गौरतलब है कि यूजीसी की ओर से जारी दिशानिर्देशों सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए बहुत भेदभाव वाले थे। इसलिए इनका व्यापक विरोध हुआ। विवाद बढ़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जहां अदालत ने इस रोक लगा दी। गुरुवार को इस पर सुनवाई हुई, जिसके दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया, ‘सरकार इस मामले की जांच कर रही है ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान हो सके और कोई भी वर्ग असंतुष्ट या आशंकित महसूस न करे’।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने हर छात्र के हितों की रक्षा करने की जरुरत पर जोर दिया। इसके बाद अदालत ने याचिकाओं की इस सुनवाई को चार सप्ताह के लिए टाल दिया है। गौरतलब है कि यह मामला ‘अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ’ और इससे जुड़े अन्य मामलों से संबंधित है। 2019 में यह याचिका रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं ने दायर की थी। आरोप है कि इन दोनों ने कैम्पस में जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद खुदकुशी कर ली थी।

इनकी याचिका में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग की गई थी। इसके बाद यूजीसी ने इस साल जनवरी में 2026 नए नियमों को अधिसूचित किया था। इससे पहले 2012 के नियम लागू थे। विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2026 के नियमों पर रोक लगा दी। कोर्ट ने इन नियमों को लेकर कहा था कि ये नियम पहली नजर में अस्पष्ट लगते हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जब तक नए नियम नहीं बन जाते, तब तक 2012 के नियम लागू रहेंगे। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में भी कोर्ट को बताया था कि इन नियमों पर फिर से विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि यूजीसी के दिशानिर्देशों के बाद सामान्य वर्ग भाजपा से नाराज है। सोशल मीडिया में इस वर्ग के राइटविंग समर्थक भी खुल कर भाजपा के खिलाफ बोल रहे हैं। हाल में बिहार और उत्तर प्रदेश में हुए एमएलसी चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के पीछे सामान्य वर्ग की नाराजगी को एक कारण बताया जा रहा है। ध्यान रहे तीन महीने के बाद उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। तभी ऐसा माना जा रहा है कि यूजीसी की ओर से जारी दिशानिर्देशों में बदलाव की पहल उस मजबूरी में हो रही है।

By NI Desk

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