राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट कभी भी भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इसे लेकर पिछले 12 वर्षों में कोई नई नीति या फैसला नहीं लिया गया है।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि विदेश मंत्रालय के हालिया स्पष्टीकरण को नए निर्णय के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत यह पहले से स्पष्ट है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं।

सूत्रों के अनुसार, कानून में कुछ परिस्थितियों में गैर नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किए जाने का प्रावधान है। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम साक्ष्य नहीं माना जाता।

इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो नागरिकता साबित करने का आधार क्या होगा। राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने भी सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची बनाने वाला अधिकारी नागरिकता पर संदेह जताए तो नागरिक के पास कौन सा वैध दस्तावेज होगा।

गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण को “बेतुका” बताते हुए कहा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो सरकार इसे जारी करते समय किस आधार पर संतुष्ट होती है।

सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि बंबई उच्च न्यायालय के 2013 के फैसलों में भी स्पष्ट किया गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है। वहीं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने भी कहा था कि आधार केवल पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं।

By NI Desk

Under the visionary leadership of Harishankar Vyas, Shruti Vyas, and Ajit Dwivedi, the Nayaindia desk brings together a dynamic team dedicated to reporting on social and political issues worldwide.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

sixteen + eleven =