कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव में मिली करारी हार और उसके बाद पार्टी में हुई टूट के बावजूद अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को महासचिव बनाए रखने का फैसला किया है। ममता बनर्जी ने अभिषेक की मदद के लिए दो संयुक्त सचिव नियुक्त किया है। हालांकि शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में तृणमूल कांग्रेस के सिर्फ पांच सांसद और आठ विधायक ही पहुंचे।
असल में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में संगठनात्मक बदलावों पर खास जोर दिया गया और विभिन्न पदों पर नई नियुक्तियों का ऐलान किया गया। बैठक में दो नए राष्ट्रीय संयुक्त सचिव नियुक्त किए गए, जबकि अभिषेक बनर्जी को पार्टी महासचिव के पद पर बरकरार रखा गया।
ममता बनर्जी की ओर से राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव बनाया गया और ये दोनों राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मदद करेंगे। बहरहाल, ममता बनर्जी की बुलाई बैठक में उनके 28 लोकसभा सांसदों में से तीन और 13 राज्यसभा सांसदों में से दो सांसद शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक हैं परंतु 58 विधायकों ने बागी होकर अलग गुट बना लिया है। बचे हुए 22 विधायकों में से सिर्फ आठ विधायक बैठक में शामिल हुए।


