बाबुल सुप्रियो तृणमूल में शामिल हुए

जुलाई में केंद्रीय मंत्री पद से हटाए गए भाजपा के सांसद बाबुल सुप्रियो तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। शनिवार को उन्होंने तृणमूल के महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी सांसद डेरेक ओ ब्रायन की मौजूदगी

अभिषेक बनर्जी को फिर ईडी का समन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को प्रवर्तन निदेशालय ने एक बार समन जारी किया है।

ईडी के सामने आज पेश होंगे अभिषेक

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी सोमवार को दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय, ईडी के सामने पेश होंगे।

Congress का हाथ छोड़कर Sushmita Dev ने आखिर पकड़ ही लिया TMC का हाथ, यहां संभाल सकती हैं नई जिम्मदारी

कोलकाता | Sushmita Dev Joins TMC: असम से कांग्रेस की पूर्व सांसद सुष्मिता देव ने आज अपनी ही पार्टी कांग्रेस को जोरदार झटका दिया और कोलकाता में वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) और डेरेक ओ ब्रायन (Derek O Brien) की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस से हाथ मिला लिया। महिला कांग्रेस प्रमुख सुष्मिता देव ने TMC में शामिल होने से पहले कल 15 अगस्त को कांग्रेस पार्टी की प्रमुख आलाकमान सोनिया गांधी को इस्तीफा सौंप दिया था। ये भी पढ़ें :-  Kinnaur Landslide में मरने वालों की संख्या 25 हुई, आज और मिले दो लोगों के शव, अभी कई लापता त्रिपुरा में पार्टी का नया चेहरा हो सकती हैं Sushmita Dev Sushmita Dev Joins TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अब टीएमसी असम में भी अपनी पकड़ बनाने में लगी हुई है। ऐसे में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वह तृणमूल कांग्रेस से त्रिपुरा में पार्टी का नया चेहरा बन सकती हैं। सुष्मिता असम के सिलचर से कांग्रेस सांसद रह चुकी हैं ऐसे में उनकी स्थिति काफी मजबूत दिखाई देती है। ये भी पढ़ें :- भारत बायोटेक Nasal Vaccine पर काम कर रहा है जो बूस्टर कोविड -19 खुराक के रूप में काम करेगा: रिपोर्ट We warmly welcome… Continue reading Congress का हाथ छोड़कर Sushmita Dev ने आखिर पकड़ ही लिया TMC का हाथ, यहां संभाल सकती हैं नई जिम्मदारी

ममता की बेचैनी बढ़ रही है

mamta banerjee trinamool delegation : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी अपने संसदीय नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के पास भेज रही हैं। यह प्रतिनिधिमंडल 15 जुलाई को चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और अनुरोध करेगा कि पश्चिम बंगाल में खाली हुई सात विधानसभा सीटों पर जल्दी उपचुनाव कराए। असल में ममता की चिंता सात सीटों की नहीं, बल्कि अपनी सीट की है। उनके पास नवंबर के पहले हफ्ते तक का समय है। अगर उस समय तक उपचुनाव नहीं होता है और वे किसी सीट से चुनाव लड़ कर विधायक नहीं बनती हैं तो उनको मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। Read also: सिद्धू के लिए आप में क्या जगह है? ममता ने घबराहट में एक और कदम उठाया है। उन्होंने विधान परिषद के गठन का प्रस्ताव राज्य विधानसभा से पास कराया है लेकिन सबको पता है कि उस प्रस्ताव को संसद में मंजूरी नहीं मिलनी है। इसलिए विधान परिषद तो उनको भूल जाना चाहिए। अब रही बात विधानसभा के उपचुनाव कराने की तो वह चुनाव आयोग की मर्जी पर निर्भर है और इस बात पर भी निर्भर है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर कब खत्म होती है और तीसरी लहर की… Continue reading ममता की बेचैनी बढ़ रही है

ममता को बंगाल में ही रोकने का प्रयास

भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षा से चिंतित हैं और मान रहे हैं कि ममता वह कर सकती हैं, जो आज तक विपक्ष का कोई नहीं कर सका है? ध्यान रहे विपक्ष का कोई नेता लोकप्रियता और विश्वसनीयता के मामले में नरेंद्र मोदी को चुनौती नहीं दे सका है। अखिल भारतीय स्तर पर किसी नेता की वैसी पहचान और साख भी नहीं बनी है, जैसी मोदी की है। लेकिन बंगाल में लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने और सीधे मुकाबले में मोदी और अमित शाह को हराने के बाद ममता चुनौती बन सकती हैं। यह भी पढ़ें: शिव सेना जानती है कांग्रेस की मजबूरी असल में ममता बनर्जी ने बंगाल में कई मिथक तोड़े हैं। मोदी की लोकप्रियता, शाह की रणनीति और भाजपा की ध्रुवीकरण कराने की क्षमता के मिथक टूट गए हैं। इसका असर दूरगामी होगा। ऊपर से ममता बनर्जी को दूसरे कई नेताओं के मुकाबले बहुत एडवांटेज हैं। उनके भतीजे को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेरने की केंद्रीय एजेंसियों के तमाम प्रयासों के बावजूद ममता के भ्रष्ट होने का नैरेटिव नहीं बन पाया है। उनकी ईमानदारी और सादगी सहज रूप से स्वीकार्य है। दूसरे, वे महिला हैं और जुझारू हैं। तीसरे, कांग्रेस छोड़… Continue reading ममता को बंगाल में ही रोकने का प्रयास

ममता दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे?

अभिषेक बनर्जी कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे : नेताओं का आत्मविश्वास अक्सर हैरान करने वाला होता है। कई बार नासमझ नेता कोई बयान देते हैं, जैसे ई श्रीधरन ने कहा कि वे केरल के मुख्यमंत्री बनेंगे, तो ऐसे बयानों की अनदेखी करनी होती है। लेकिन कई बार बहुत जानकार और सीजन्ड नेता इस तरह के बयान देते हैं। जैसे ममता बनर्जी ने कहा है कि उनकी पार्टी अब राष्ट्रीय राजनीति करेगी। उन्होंने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अभिषेक ने कहा कि वे पार्टी को पूरे देश में ले जाएंगे और चुनाव लड़ेंगे। अब सोचें, अभिषेक बनर्जी पार्टी को कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे? क्या वे अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में पार्टी को चुनाव लड़ाएंगे? इससे उनको क्या हासिल होगा? ममता ने मोदी पर किया हमला तृणमूल कांग्रेस पहले भी इस तरह राष्ट्रीय राजनीति करने का प्रयास कर चुकी है। झारखंड में इधर-उधर के नेताओं को जुटा कर तृणमूल को खड़ा करने का प्रयास हुआ था। ममता बनर्जी भी रैली करने पहुंची थीं। लेकिन अंत नतीजा क्या हुआ? इधर-उधर से आए सारे नेता फिर इधर-उधर चले गए। बिल्कुल यहीं कहानी त्रिपुरा में भी दोहराई गई थी। ममता बनर्जी के… Continue reading ममता दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी कहां राष्ट्रीय राजनीति करेंगे?

ममता ने भतीजे को बनाया महासचिव

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी का पूरे देश में विस्तार करने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने इसके लिए अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव किया है। इससे पहले पार्टी महासचिव की जिम्मेदारी दिनेश त्रिवेदी के पास थी, जो अह भाजपा में शामिल हो गए हैं। अभिषेक को राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि यह ममता बनर्जी की पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री की शुरुआत है। अभिषेक बनर्जी अभी डायमंड हार्बर से सांसद हैं। ममता ने तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के 34 दिन बाद पार्टी संगठन में बदलाव करते हुए कुणाल घोष को प्रदेश का महासचिव और बंगाली अभिनेत्री सायोनी घोष को पार्टी के युवा शाखा की कमान सौंपी है। सायोनी घोष आसनसोल से चुनाव भी लड़ चुकी हैं, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सायोनी से पहले यूथ विंग की कमान अभिषेक के पास थी। वहीं, कुणाल घोष अभी तक पार्टी के प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभा रहे थे। उन्हें अभिषेक बनर्जी का नजदीकी भी बताया जाता है। कुणाल घोष तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा… Continue reading ममता ने भतीजे को बनाया महासचिव

क्षत्रपों की तीसरी पीढ़ी का समय

प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी कांग्रेस के वंशवाद को बड़ा मुद्दा बनाते रहे हैं। उनके लिए वंशवाद का मतलब गांधी-नेहरू परिवार है, जिसकी पांचवीं पीढ़ी के राहुल और प्रियंका राजनीति कर रहे हैं। इनके अलावा पांच पीढ़ी से राजनीति करने वाले परिवार गिने-चुने हैं। पिछले तीन-चार दशक में देश में जो प्रादेशिक क्षत्रप उभरे और उनकी दूसरी पीढ़ी इस समय सक्रिय है। उन्हीं में कुछ परिवारों की दूसरी और कुछ की तीसरी पीढ़ी अब राजनीति में आ गई है और सफल हो गई है। तमाम विरोध और दुष्प्रचार के बावजूद इस इस पीढ़ी ने अपने लिए जगह बनाई है और तमाम बड़े नेताओं के लिए चुनौती बन रहे हैं। इसमें सबसे पहले ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का नाम लिया जा सकता है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के अलावा दूसरा सबसे बड़ा टारगेट अभिषेक बनर्जी थे। प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री तक ने उनको निशाना बनाया। उनकी पत्नी और ससुराल वालों से सीबीआई ने पूछताछ की। लेकिन अभिषेक बनर्जी चुनाव मैदान में डटे रहे और भाजपा व उसके शीर्ष नेताओं पर सीधा हमला करते रहे। पश्चिम बंगाल में ममता की तीसरी बार की जीत ने अभिषेक बनर्जी यानी एबी का कद बहुत बड़ा कर दिया है।… Continue reading क्षत्रपों की तीसरी पीढ़ी का समय

शाह के खिलाफ मानहानि मामला दूसरी अदालत में हस्तांतरित

पश्चिम बंगाल में साल्ट लेक में विधाननगर की एक विशेष अदालत ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दायर मानहानि मामले को सोमवार को बांकशाल मेट्रोपाॅलिटन कोर्ट में हस्तांतरित कर दिया।

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