नई दिल्ली। संसद सत्र के दौरान संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने और लोकसभा के अंदर पीली गैस छोड़ने के आरोप में गिरफ्तार आरोपियों में से दो को जमानत मिल गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में नीलम आजाद और महेश कुमावत को कई शर्तों के साथ जमानत दे दी है। हाई कोर्ट ने बुधवार को इन दोनों आरोपियों को 50 हजार रुपए के निजी बॉन्ड पर जमानत मंजूर की। इससे पहले सुनवाई अदालत ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कई सख्त शर्तों के साथ जमानत दी है। आरोपियों को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, इंटरव्यू देने या घटना के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा दोनों आरोपियों को हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुबह 10 बजे संबंधित पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने को कहा गया है। इसके अलावा उन्हें दिल्ली और एनसीआर से बाहर नहीं जाने का भी आदेश दिया गया है।
जमानत पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत हैं। पुलिस ने कहा कि जमानत देने से इनके भागने, गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने का खतरा है। दूसरी ओर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि पेश किए गए सबूत राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा साबित नहीं करते हैं। वकील ने कहा कि आरोपियों पर संसद परिसर में शारीरिक हमला किया गया। यह उस दिन की घटनाओं के बारे में पुलिस के बयान पर सवाल उठाता है। इसके बाद अदालत ने सख्त शर्तों के साथ आरोपियों को जमानत दी।
गौरतलब है कि संसद की नई इमारत के दूसरे सत्र यानी मानसून सत्र के दौरान 13 दिसंबर 2023 को आरोपियों ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाई थी। यह 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी का दिन था। उस दिन लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सागर शर्मा और मनोरंजन डी विजिटर गैलरी से नीचे लोकसभा में कूदे। उन्होंने सदन में पीली गैस छोड़ी और नारेबाजी की। लोकसभा में मौजूद सांसदों ने उन्हें पकड़ा था। वहीं, दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने संसद कैंपस में रंगीन गैस स्प्रे की और नारेबाजी की थी। मामले की जांच में पुलिस ने दो अन्य आरोपियों ललित झा और महेश कुमावत को गिरफ्तार किया था।