रक्षा मंत्रालय की एक अहम बैठक में मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना को नए राफेल लड़ाकू विमान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राफेल विमान का यह सौदा फ्रांस के साथ होना है। इस बैठक में करीब 3.60 लाख करोड़ रुपए के रक्षा खरीद प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई है।
इस फैसले से तीनों सेनाओं की लड़ाकू क्षमता और तैयारियों में बड़ा इजाफा होगा। नई दिल्ली में गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की यह बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वायुसेना के लिए राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट, आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलों व हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट खरीदने को मंजूरी दी गई है। थलसेना के लिए एंटी-टैंक माइन और टी-72 टैंक और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के ओवरहॉल को स्वीकृति दी गई है।
वहीं, नौसेना को लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान मिलेंगे। नई दिल्ली में हुई इस बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल की खरीद को मंजूरी दी गई है।
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बता दें कि बीते वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल की मदद से पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दरअसल, राफेल जैसे लड़ाकू विमान वायुसेना को दुश्मन पर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत देंगे। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अच्छी बात यह है कि ज्यादातर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलें और एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट खरीदने के लिए भी मंजूरी मिली है। ये नई मिसाइलें दुश्मन के ठिकानों पर दूर से ही सटीक वार करने में मदद करेंगी। एएस-एचएपीएस सैटेलाइट सिस्टम लगातार निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य संचार को मजबूत करने में काम आएगा।
भारतीय थलसेना के लिए भी कई महत्वपूर्ण हथियारों को मंजूरी दी गई है। एंटी-टैंक माइन ‘विभव’ और टी-72 टैंक, इन्फैंट्री युद्धक वाहन बीएमपी-II और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के ओवरहॉल को मंजूरी मिली है।
गौरतलब है कि ‘विभव’ माइंस दुश्मन के टैंकों और भारी गाड़ियों की रफ्तार रोकने में कारगर होंगी। वहीं, टैंकों और सैन्य वाहनों को अपग्रेड करने से उनकी उम्र और क्षमता दोनों बढ़ेंगी। भारतीय नौसेना के लिए 4 मेगावॉट मरीन गैस टरबाइन आधारित इलेक्ट्रिक पावर जेनरेटर को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान पी 8आई खरीदने को मंजूरी दी गई है। ये पी 8आई विमान पनडुब्बी रोधी अभियानों, समुद्री निगरानी और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत करेंगे।
वहीं, पावर जेनरेटर भारत में ही ‘मेक-1’ कैटेगरी के तहत विकसित होंगे, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी। इसके अलावा, भारतीय तटरक्षक बल के डॉर्नियर विमानों के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इन्फ्रारेड सिस्टम खरीदे जाएंगे। इससे समुद्री निगरानी और ज्यादा प्रभावी होगी। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि ये फैसले भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देंगे और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगे।
Pic Credit : ANI
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