नई दिल्ली। अरावली बचाने को लेकर तेज हो रहे आंदोलन के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक बार फिर लोगों को भरोसा दिलाया है। उन्होंने एक खुली चिट्ठी लिखी है। ‘एक पाती अलवर के नाम’ पत्र के जरिए उन्होंने अरावली पर्वत शृंखला को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि अरावली पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पर्यावरण संरक्षण, अवैध खनन पर रोक और विकास के संतुलन को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
अपनी चिट्ठी में भूपेंद्र यादव ने लिखा है, ‘अलवर अरावली पर्वतमाला का अभिन्न अंग है, जहां सरिस्का टाइगर रिजर्व और सिलीसेढ़ झील जैसी धरोहर स्थित है। इनके संरक्षण और विकास से कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता’। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से अरावली को लेकर दी गई परिभाषा कोई नई नहीं है। यह वही परिभाषा है, जो राजस्थान में साल 2002 में गहलोत सरकार के कार्यकाल में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर पहले से लागू है, जिसके तहत स्थानीय भूमि स्तर से 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियां अरावली मानी जाती है। उन पर खनन प्रतिबंधित है।
उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट की परिभाषा से 90 प्रतिशत से अधिक अरावली क्षेत्र सुरक्षित रहेगा। इससे पहले उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सारे पहलुओं पर सफाई दी थी। इसके बावजूद राजस्थान में विवाद थम नहीं रहा है। कांग्रेस पार्टी और सामाजिक संगठन अरावली की रक्षा के लिए अलग अलग हिस्सों में आंदोलन कर रहे हैं।
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