तेल अवीव। इजराइल में हुए संसद के चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने और सरकार बनाने में पैदा हुए गतिरोध के बाद अब विपक्षी पार्टियां किसी तरह से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को हटाने के उपाय खोज रही हैं। नेतन्याहू के विरोधी पार्टियां सीधे प्रधानमंत्री चुनने की पुरानी व्यवस्था वापस लाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसके तहत जनता सांसदों और पार्टियों को वोट देने के अलावा सीधे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को भी चुन सकेगी। पिछले तीन दशक में तीन बार ऐसा हो चुका है।
गौरतलब है कि, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गुट को बहुमत नहीं मिला है। नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। वहीं, अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें आईं। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। विपक्ष के पास अरब पार्टियों को मिलाकर 67 सीटें हैं, लेकिन उसके कई नेता अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में सरकार बनाने का रास्ता मुश्किल हो गया है।
इसी गतिरोध को खत्म करने के लिए विपक्ष सीधे प्रधानमंत्री चुनने की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। प्रधानमंत्री चुनने का तरीका बदलने के लिए सरकार से जुड़े मूल कानून में संशोधन करना होगा। इसके लिए संसद के कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। इसे संसद में पेश भी नहीं किया गया है।
इजराइल में इससे पहले 1996 और 1999 में प्रधानमंत्री और संसद के लिए अलग अलग वोटिंग हुई थी। 2001 में भी सिर्फ प्रधानमंत्री चुनने के लिए अलग चुनाव कराया गया था। 1996 में पहली बार बेंजामिन नेतन्याहू ने शिमोन पेरेज को हराकर प्रधानमंत्री पद का चुनाव जीता था। 1999 में एहुद बराक ने नेतन्याहू को हराया। वहीं, 2001 में एरियल शेरोन ने एहुद बराक को हराकर प्रधानमंत्री पद हासिल किया था। 2001 में ही इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
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