नई दिल्ली। अडानी समूह द्वारा जेपी ग्रुप के अधिग्रहण को चुनौती देने के दो महीने के भीतर अनिल अग्रवाल का वेदांता समूह प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के निशाने पर आ गया। ईडी ने मंगलवार, दो जून को वेदांता समूह के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। खबरों के मुताबिक, यह कार्रवाई समूह के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर की गई। गौरतलब है कि जेपी समूह के अधिग्रहण को अनिल अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उनकी बोली ज्यादा बड़ी थी। हालांकि उनको अदालत से राहत नहीं मिली।
बहरहाल, बताया जा रहा है कि ईडी की कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी फेमा के नियमों के कथित उल्लंघन की वजह से हुई है। गौरतलब है कि इस समय कंपनी अपने कारोबार को पांच अलग अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। ईडी की कार्रवाई से डिमर्जर की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को हुई ईडी कार्रवाई मुख्य रूप से रॉयल्टी के भुगतान से जुड़ी है। जांच एजेंसी उस रॉयल्टी भुगतान की जांच कर रही है जो भारतीय कंपनी ‘वेदांता लिमिटेड’ की तरफ से अपनी मूल यानी पैरेंट कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को किया गया था। वेदांता रिसोर्सेज ब्रिटेन में स्थित एक कंपनी है, जो इस समय भारी कर्ज से जूझ रही है।
ईडी की कार्रवाई पर वेदांता समूह के प्रवक्ता ने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और उनके द्वारा मांगी जा रही सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। वेदांता सभी लागू कानूनों और नियमों के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मामला अभी रेगुलेटरी प्रोसेस के अधीन है, इसलिए हम इस स्टेज पर इससे ज्यादा कुछ भी कहने और करने में असमर्थ हैं’।


