नई दिल्ली। अमेरिका से ‘अनुमति’ मिलने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। कहा जा रहा है कि भारत ने तीन करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इसमें एक करोड़ बैरल सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने खरीदी है तो एक करोड़ बैरल रिलायंस समूह ने खरीदी है। बाकी कंपनियों ने मिल कर एक करोड़ बैरल खरीदा है। गौरतलब है कि ईरान से जंग में हालात बिगड़ने पर अमेरिका ने कहा कि उसने भारत को 30 दिन की राहत दी है। यानी इस अवधि में भारत रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है।
ऐसे में भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने उन रूसी जहाजों को सुरक्षित किया है, जो पहले से ही एशियाई समुद्र में मौजूद थे, लेकिन उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे थे। होरमुज की खाड़ी बंद होने और जंग की वजह से यह परेशान आ रही थी। जहाजों की आवाजाही के आंकड़ों से पता चला है कि रूसी जहाज ‘मायलो’ और ‘सारा’ जैसे कई बड़े तेल टैंकर, जो पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अब भारत के बंदरगाहों की तरफ अपना रास्ता मोड़ लिया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका से छूट मिलने के तुरंत बाद इन जहाजों के गंतव्य बदल दिए गए।
यह भी बताया जा रहा है कि रूस ने इस बार यूराल्स, ईएसपीओ और वरांडे जैसे ग्रेड का तेल ऑफर किया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी और इसकी जगह सऊदी अरब और इराक से ज्यादा तेल लेना शुरू किया था। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में रूस से आयात घटकर 10.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो कि 2024 के मध्य में 20 लाख बैरल प्रति दिन से ज्यादा था। जंग की वजह से एक बार फिर भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया है।


