चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में फूट के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के उपयोग पर अंतरिम रोक लगाने के एक दिन बाद शुक्रवार ममता बनर्जी धड़े को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न तथा अरूप रॉय धड़े को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और “लिफाफा” चुनाव चिन्ह आवंटित किया।
दोनों गुट पश्चिम बंगाल विधान सभा की दो सीटों और असम से लोक सभा की एक सीट के लिए कराये जा रहे उप चुनाव में इन्हीं अंतरिम नामों और चिह्नों का प्रयोग करेंगे। आयोग ने दोनों गुटों के दवों और प्रति दावों के बीच गुरुवार को अंतरिम आदेश में पार्टी के ‘आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और उसके लिए आरक्षित “तृण-पुष्प ” चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है। आयोग ने यह निर्णय जारी करते हुए दोनों पक्षों के अपने-अपने लिए वैकल्पिक नाम और चिह्न के सुझाव मांगे थे और उन्हें तीन-तीन विकल्प देने को कहा था।
गुरुवार का अंतरिम आदेश आने से पहले दोनों धड़ों ने पश्चिम रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों तथा असम की नगांव लोकसभा सीट पर प्रत्याशियों के परचे दाखिल करते हुए अपने को असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस होने का दावा किया था।
आयोग ने गुरुवार 17 सितम्बर के अंतरिम आदेश में व्यवस्था दी है कि दोनों गुटों को विवाद के निपटारे तक ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने पर रोक बनी रहेगी। तृणमूल कांग्रेस के धड़ों के बीच यह विवाद निर्वाचन चिन्ह (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत विचाराधीन है। आयोग के अंतरिम निर्णय से पहले ही दोनों धड़ों के उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी ओर से अधिकृत किए गए दस्तावेजों के आधार पर नामांकन दाखिल कर दिया था।
Also Read : शेयर बाजारों में लिवाली का जोर, आईटी कंपनियां दबाव में
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधान सभा सीट के उप चुनाव में सफीउज्जमान सैख ने अरूप रॉय द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी के साथ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था। वहीं, रबीउल आलम चौधरी ने ममता बनर्जी द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी के साथ उसी पार्टी के समर्थन का दावा करते हुए अलग नामांकन दाखिल किया।
नंदीग्राम में अरूप रॉय गुट ने एहतेशमुल हक को और ममता बनर्जी धड़े ने संचिता प्रधान (डे) को उतारा है। असम की नगांव लोकसभा सीट सुश्री बनर्जी ने अब्दुल सलाम से परचा दाखिल कराया है।
इन क्षेत्रों के चुनाव अधिकारियों ने नामांकन पत्रों की जांच 18 सितंबर तक स्थगित कर दी थी। आयोगके हस्तक्षेप के बिना अधिकारियों के सामने ऐसी स्थिति पैदा हो सकती थी जिसमें दोनों दलों के प्रत्याशियों के नामांकन खारिज किये जा सकते थे। इसका प्रभाव मतदाताओं के समक्ष उपस्थित विकल्पों पर पड़ता।
आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और निर्वाचन चिन्ह आदेश के तहत अपने ‘अवशिष्ट एवं अंतर्निहित अधिकारों’ का इस्तेमाल करते हुए इस ममाले में हस्तक्षेप के लिए अंतरिम व्यवस्था दी है। आयोग का कहना है कि यह हस्तक्षेप “मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने, चुनावी प्रक्रिया की अखंडता बनाए रखने और विवाद के अंतिम निपटारे तक किसी भी उम्मीदवार या गुट के साथ अनुचित पूर्वाग्रह न होने देने” के उद्देश्य से किया गया है।
आयोग की अंतिरिम व्यवस्था के अनुसार उपरोक्त तीनों उप चुनावाें में इन दोनों धड़ों के प्रत्याशी अपने अपने धड़े के अंतरिम नाम और चुनाव चिह्न पर ही चुनाव लड़ सकेंगे।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि 18 सितंबर का यह आदेश नामांकन पत्रों की वैधता या पार्टी की पहचान और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों के दावों पर अंतिम फैसला नहीं है। रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नामांकन पत्रों की जांच और चुनाव चिन्ह आवंटित करते समय इस आदेश को ध्यान में रखें, लेकिन साथ ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत नामांकन पत्रों की स्वतंत्र रूप से जांच भी करें।
Pic Credit : ANI
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



