नई दिल्ली। इजराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उसने कहा है कि वह समझौते को नहीं मानेगा। इतना ही नहीं समझौते से नाराज इजराइल ने कहा है कि वह अमेरिका का गुलाम नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से नाराजगी जताई थी और लेबनान पर हमला रोकने को कहा था। लेकिन अब इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह लेबनान पर हमले जारी रखेगा।
गौरतलब है कि ईरान ने लेबनान को शांति समझौते में शामिल किया है। उसने लेबनान के हिजबुल्ला पर हमला रोकने की शर्त रखी थी। अमेरिका ने शर्त स्वीकार कर ली है। परंतु इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि, उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि लेबनान, सीरिया और गाजा में बनाए गए सुरक्षा जोन में इजराइली सेना अनिश्चितकाल तक तैनात रहेगी।
इससे पहले इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने शांति समझौते पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘हम अमेरिका के गुलाम नहीं है। इजराइल एक आजाद देश हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह समझौता इजराइल पर लागू नहीं होता’। दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता अमेरिका के साथ हुए समझौते की प्रमुख शर्तों में शामिल है। बघाई ने कहा कि समझौते में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने और लेबनान की स्वतंत्रता व उसकी सीमाओं का सम्मान करने पर जोर दिया गया है।
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कन्फर्म किया कि अमेरिका और ईरान 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में शांति समझौते पर दस्तखत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो 47 साल में ईरान और अमेरिका के बीच यह पहली उच्च स्तरीय बैठक होगी।
हालांकि अभी तक ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते का पूरा दस्तावेज जारी नहीं किया गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि समझौता ज्ञापन पर दस्तखत होने के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की अमेरिका व ईरान की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन वादे पूरे करता है या नहीं। गरीबाबादी ने कहा है कि अमेरिका को नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करनी होगी, युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना होगा और ईरान के जब्त किए गए फंड जारी करने होंगे।


