नई दिल्ली। परमाणु हथियारों के खिलाफ दुनिया भर में अभियान चलाने वाले जापान के संगठन निहोन हिदांक्यो को इस साल शांति के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया गया है। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में नोबल कमेटी ने इसका ऐलान किया। पूरी दुनिया में परमाणु हथियारों के खिलाफ मुहिम चलाने वाले इस संगठन में वे लोग शामिल हैं जो दूसरे विश्व युद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में जीवित बचे थे।
इन लोगों को हिबाकुशा कहा जाता है। ये हिबाकुशा दुनिया भर में अपनी पीड़ा और दर्दनाक यादों को निहोन हिदांक्यो संगठन के जरिए साझा करते हैं। नोबल कमेटी ने कहा है कि एक दिन परमाणु हमले को झेलने वाले ये लोग हमारे पास नहीं रहेंगे, लेकिन जापान की नई पीढ़ी उनकी याद और अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करती रहेगी और उन्हें याद दिलाती रहेगी कि परमाणु हथियार दुनिया के लिए कितने खतरनाक हैं।
निहोन हिदांक्यो संगठन की स्थापना 1956 में परमाणु और हाइड्रोजन बमों के खिलाफ हुई दूसरी वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई थी। संगठन ने अपनी स्थापना के बाद से हिबाकुशा यानी पीड़ित लोगों के समूहों को दुनिया के अलग अलग हिस्सों में भेजा, जिससे दुनिया के लोगों को परमाणु हथियारों से होने वाले भयानक नुकसान और मानव पीड़ा के बारे में बताया जा सके। संगठन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि दुनिया में कहीं भी और हिबाकुशा न बनाए जाएं, और दुनिया परमाणु हथियार मुक्त बन सके।
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Image Source: ANI


