अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की नौ पन्नों की चिट्ठी और उनकी ओर से लगाए गए मनमानी के आरोपों पर नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि सब मीडिया की मनगढ़ंत कहानी है। हालांकि चंपत राय की चिट्ठी सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। मीडिया ने जब उनसे चंपत राय के आरोपों पर सवाल किया तो वे नाराज हो गए।
उन्होंने कहा, ‘मैंने कोई ऐसा पत्र नहीं देखा है। जब तक पत्र नहीं देख लूंगा, तब तक यही कहूंगा कि ये मीडिया की मनगढ़ंत गाथा होगी। आप लोग सिर्फ विवाद पैदा करना चाहते हैं। इसके लिए ही आप लोग मुझसे ऐसा सवाल कर रहे हैं। हो सकता है कि 9 पन्नों का लेटर हो, लेकिन फिर भी उसमें उन्होंने (चंपत राय) इस तरह की आलोचना नहीं की होगी’। गौरतलब है कि, चंपत राय का गुरुवार को नौ पन्नों का पत्र वायरल हुआ था। पत्र में 18 अगस्त की तारीख पड़ी थी। इसमें उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका को लेकर कई दावे किए। साथ ही मनमानी का आरोप लगाया था। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद चंपत राय ने 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। छह जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा मंजूर किया गया था।
बहरहाल, चंपत राय ने चिट्ठी में कहा है, ‘राम मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी थे और नृपेंद्र मिश्र को निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। मिश्र के सुझाव पर लार्सन एंड टूब्रो को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। भवनों के डिजाइन और निर्माण से जुड़े काम के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म का चयन भी किया’। चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र मिश्र ने निर्माण समिति में अपनी पसंद के लोगों को शामिल किया। इनमें से कुछ लोग छह साल के दौरान केवल एक या दो बार ही अयोध्या आए। उन्होंने यह भी लिखा कि एनबीसीसी के पूर्व चेयरमैन अनूप मित्तल लगातार नृपेंद्र मिश्र के साथ निर्माण समिति की बैठकों में शामिल होते थे।
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