नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों के 10 सांसदों का एक दल शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला। विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी के आरोप लगा रहा है। राष्ट्रपति से विपक्षी पार्टियों के नेताओं की मुलाकात रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। विपक्षी नेताओं ने पहले कहा था कि सांसदों और अन्य लोगों का करीब तीन सौ लोगों का एक समूह राष्ट्रपति से मिलना चाहता है। लेकिन बाद में चुनिंदा नेता राष्ट्रपति से मिले।
इससे पहले विपक्षी सांसद और अन्य नेता संसद भवन से मार्च करते हुए रायसीना हिल्स पर स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। इस बीच प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षाकर्मियोंसे बहस हो गई, जिसके बाद वे सांसदों के साथ विजय चौक पर ही धरने पर बैठ गईं। बहरहाल, राहुल गांधी के साथ विपक्ष के कई नेता मार्च में शामिल हुए। ममता बनर्जी भी मार्च में शामिल थीं और राष्ट्रपति से मिलीं। ‘सेव डेमोक्रेसी’ का बैनर लेकर विपक्षी सांसदों ने मार्च किया।
राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने से पहले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इस बैठक में राहुल ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 14 अगस्त 1947 को दिया भाषण पढ़ा। उन्होंने कहा, ‘एक नई उम्मीद जन्म ले रही है और लंबे समय से संजोया गया सपना साकार हो रहा है। उम्मीद है कि यह सितारा कभी अस्त न हो और यह उम्मीद कभी निराश न हो’।
इससे पहले कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘हम आगे क्या कदम उठाएंगे, इसकी जानकारी आपको देंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। परसों तक हम अपने फैसले के मुताबिक आगे बढ़ते रहेंगे’। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन रोक दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है। लोकतांत्रिक देश में आंदोलन और जुलूस होते रहेंगे। सरकार को इन्हें उसी तरह संभालना चाहिए। लेकिन यह सरकार पूरी तरह तानाशाही तरीके से काम कर रही है’।
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