नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में हुई गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई पर हमला बोला है। राहुल ने सीबीएसई के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया गया उस पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने ठेका प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि छात्रों की उत्तर पुस्तिका को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर की बजाय मोबाइल फोन से स्कैन किया गया। राहुल गांधी ने सीबीएसई के छात्र सार्थक सिद्धांत की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डाली गई पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि अगस्त में ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का टेंडर दोबारा जारी किया गया था। उस समय कई जरूरी शर्तें हटा दी गईं और स्कैनिंग की क्वालिटी भी 300 डीपीआई से घटा कर 200 डीपीआई कर दी गई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं के धुंधले पन्ने, गायब पन्ने और कई कॉपियों का स्कैन न होना सिर्फ तकनीकी गलती नहीं है। उनके मुताबिक, यह सब किसी खास वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए दिए गए ठेके का नतीजा है। उन्होंने कहा कि यह एक धोखा है। और हर वह बच्चा, जिसके अंकों का गलत मूल्यांकन हुआ है, वह इस धोखे का शिकार है।
राहुल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी हमला किया। उन्होंने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं। मोदी जी की यह चुप्पी अब सिर्फ उनकी उदासीनता नहीं रही। यह इस अपराध में उनकी मिलीभगत को दर्शाती है। जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती। बढ़ाई जाती है और इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं। अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य से’।
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘जेबकतरों से सावधान, आज वो सीबीएसई के अंदर बैठे हैं। सीबीएसई की गलती से नंबर गलत आए तो आपको क्या मिलता है। एक बिल, अपनी ही की सही जांच आंसरशीट के लिए एक बच्चे को दो हजार रुपए तक भरने पड़ सकते हैं’। उन्होंने आगे लिखा, ‘सोचिए, जब चार लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डालें हैं तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा है। जब स्कैनिंग फोन से हुई हो, ग़लत मार्किंग तय है। और उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है। गलती सीबीएसई की। सजा बच्चे की। कमाई सरकार की’।


