नई दिल्ली। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा स्वीकार होने के एक दिन बाद चंपत राय ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने हाथ से लिखी एक चिट्ठी जारी की है, जिसमें कहा है कि उनका जीवन खुली किताब रहा है। उन्होंने यह भी लिखा है कि वे अभी मौन रहेंगे और राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की जांच कर रही एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही बोलेंगे। गौरतलब है कि सोमवार को ट्रस्ट की बैठक हुई थी, जिसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किया गया था।
चंपत राय ने इसके एक दिन बाद मंगलवार को अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी रामचरितमानस की एक चौपाई लिखी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी’। इसका अर्थ है कि धैर्य, धर्म, मित्र और पत्नी इन चारों की वास्तविक परीक्षा विपत्ति के समय ही होती है।
चंपत राय ने राम भक्तों के नाम हाथों से लिखी चिट्ठी भी जारी की। इसमें उन्होंने लिखा, ‘राम मंदिर में दानपात्र की गणना के समय की गई चोरी को लेकर मेरे ऊपर अनर्गल आरोप लगाए गए हैं, मैंने मौन धारण कर लिया है। सोमवार को ट्रस्ट की बैठक में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की गई, जो अब सार्वजनिक हो चुकी है। जबकि रिपोर्ट परम गोपनीय थी। आप सभी को भरोसा देता हूं कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद मैं अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों और दुष्प्रचार का तथ्यात्मक जवाब दूंगा। सच्चाई सबके सामने आ जाएगी’।
चंपत राय ने यह भी लिखा कि उन्हें अक्टूबर 1991 में संगठन ने अयोध्या भेजा था। उन्होंने लिखा कि करीब 45 सालों का उनका सार्वजनिक जीवन खुली किताब की तरह है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद भी चंपत राय अयोध्या में ही हैं। इस बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने मंगलवार को खुल कर चंपत राय की तरफदारी की। उन्होंने कहा कि चंपत राय निर्दोष हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय सावधान नहीं रहे।


