नई दिल्ली। खाने पीने की चीजों की महंगाई के कारण खुदरा महंगाई दर डेढ़ साल में पहली बार चार फीसदी की सीमा से ऊपर गई है। जनवरी 2025 के बाद पहली बार खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से तय की गई सीमा के औसत से ज्यादा हो गई है। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई दर की औसत सीमा चार फीसदी तय की है। सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक जून के महीने में यह 4.38 फीसदी पहुंच गई।
सरकारी आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि लगातार छह महीने से खुदरा महंगाई की दर बढ़ रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून के महीने में सब्जियों के साथ साथ खाने पीने की कई चीजों की महंगाई बढ़ी है। इसी वजह से खुदरा महंगाई दर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई। इस साल जनवरी में यह 2.74 फीसदी थी, जबकि एक महीने पहले मई में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी। इस तरह लगातार छठे महीने इसमें बढ़ोतरी हुई है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून महीने में खाने, पीने के सामानों की महंगाई यानी बढ़कर 5.32 फीसदी पर पहुंच गई है। मई में यह आंकड़ा 4.38 फीसदी पर था। इस तरह खाने पीने की महंगाई में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया के तनाव और ईरान व अमेरिका की जंग के कारण कच्चे तेल और कई अन्य वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। इस वजह से महंगाई बढ़ रही है।
बहरहाल, भारतीय रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई दर की अधिकतम सीमा छह फीसदी तय की है। इस लिहाज से कह सकते हैं कि महंगाई अभी रिजर्व बैंक द्वारा तय की गई सीमा के अंदर ही है। फिर भी अंदेशा जताया जा रहा है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर महंगाई की वजह से केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तो आगे आने वाली तिमाहियों में आर्थिक विकास की दर प्रभावित हो सकती है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जंग के अलावा इस बार अल नीनो की स्थितियों के कारण मानसून में कम बारिश होने की आशंका है। सो, ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने और मानसून खराब होने की आशंका से ही रिजर्व बैंक ने जून में हुई मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक में महंगाई के अनुमान को 4.6 से बढ़ा कर 5.1 फीसदी कर दिया था।
असल में केंद्र सरकार ने साल 2024 को बेस ईयर बनाकर महंगाई के आकलन की नई सीरीज की शुरुआत की है। इसमें जनवरी में संशोधित खुदरा महंगाई 2.74 फीसदी दर्ज हुई थी। इसके बाद कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई। फरवरी में यह 3.21, मार्च में 3.4, अप्रैल में 3.48 और मई में 3.93 फीसदी दर्ज की गई थी। सरकार ने महंगाई के आकलन के लिए सिर्फ बेस ईयर नहीं बदला है, बल्कि कई वस्तुओं को इससे बाहर किया गया है। खाने पीने की चीजों की महंगाई का पहले ज्यादा वजन होता था। उसे कम किया गया है।
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