नई दिल्ली। देश के जाने माने पर्यावरणविद् और लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जेल से रिहा हो गए हैं। केंद्र सरकार ने उनके ऊपर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए भी हटा लिया है। एनएसए हटाने का आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया, जिसके बाद सोनम वांगचुक को शनिवार को ही जोधपुर की जेल से रिहा कर दिया गया। वांगचुक 170 दिन के बाद जेल से रिहा हुए हैं।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, सोनम वांगचुक ने एनएसए के तहत अपनी हिरासत की अवधि का करीब आधा हिस्सा पूरा कर लिया है। सरकार के फैसले के बाद सुबह करीब 10 बजे वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जोधपुर जेल पहुंचीं। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद दोपहर सवा बजे के करीब उनको जेल से रिहा किया गया। सोनम वांगचुक अपनी पत्नी के साथ एक निजी गाड़ी से जेल से निकले।
असल में लद्दाख को पूर्ण राज्य बनाने और उसे छठी अनुसूची में डालने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था। सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठे थे और उसी दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह हिंसा हुई थी। दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें तत्काल जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। वे 170 दिन से जोधपुर जेल में थे।
सरकार ने सोनम वांगचुक को छोड़ने का फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर 17 मार्च को होने वाली अंतिम सुनवाई से दो दिन पहले किया। कोर्ट ने अंतिम सुनवाई के दौरान वो वीडियो और फोटो देखने की बात कही है, जिनके आधार पर सरकार ने वांगचुक के खिलाफ एनएसए लगाया था। इस बीच केंद्र सरकार ने कहा कि वांगचुक को रिहा करने का फैसला लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के लिए लिया गया है। सरकार ने कहा कि लद्दाख में विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।


