नई दिल्ली। केरल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के छह दिन बाद तक कांग्रेस पार्टी तय नहीं कर पाई है कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा। गौरतलब है कि चार मई को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। उसके बाद बंगाल और तमिलनाडु में नए मुख्यमंत्री की शपथ हो चुकी है। पुडुचेरी और असम में सीएम का नाम और शपथ की तारीख तय हो गई है, लेकिन छह दिन बाद भी केरल में कांग्रेस नाम नहीं तय कर पाई है।
गौरतलब है कि केरल की 140 सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत हासिल किया है।
पूर्ण बहुमत पाने वाले कांग्रेस के गठबंधन ने अपने सीएम के नाम का ऐलान नहीं किया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन और पार्टी के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। छह मई को कांग्रेस ने मुकुल वासनिक और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर केरल भेजा था। दोनों नेताओं ने सभी विधायकों से बात की थी। उसके बाद पार्टी आलाकमान को फैसला करने के लिए अधिकृत कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि वासनिक और माकन ने आलाकमान को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें विधायकों ने केसी वेणुगोपाल के नाम पर मुहर लगाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के 63 विधायकों में करीब 45 विधायकों ने केसी वेणुगोपाल को समर्थन दिया। गौरतलब है कि वेणुगोपाल अभी सांसद हैं। अगर वे सीएम बनते हैं तो इरिक्कूर से चुनाव जीते सनी जोसेफ अपनी सीट से इस्तीफा दे सकते हैं। वेणुगोपाल वहां से उपचुनाव लड़ सकते हैं।
जानकार सूत्रों का कहना है कि विधायकों की बैठक में वीडी सतीशन को सिर्फ छह विधायकों का समर्थन मिला। हालांकि, बैठक के बाद तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने सतीशन के नाम का समर्थन किया है। इसके अलावा कांग्रेस की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस (जोसेफ) ने खुले तौर पर सतीशन को समर्थन दिया है।
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