नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका में चल रही जंग के असर से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की खबरों के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है। 31 मार्च को खत्म वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था उससे पहले के वित्त वर्ष के मुकाबले ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ी। इस दौरान सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 7.7 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हुई। ईरान में 28 फरवरी को जंग शुरू हुई थी। लेकिन जनवरी से मार्च के बीच आखिरी तिमाही में विकास दर 7.8 फीसदी रही।
गौरतलब है कि फरवरी में सरकार का अपना अनुमान था कि पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 7.6 फीसदी रहेगी। उससे पहले के वित्त वर्ष यानी 2024-25 में जीडीपी की दर 7.1 फीसदी रही थी। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष यानी 2026-27 में विकास दर की रफ्तार घटकर 6.6 फीसदी रह सकती है। बहरहाल, पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च में अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी। हालांकि, विनिर्माण सेक्टर की विकास दर 12.8 से घट कर 7.3 फीसदी रह जाने से आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी। इसी वजह से चौथी तिमाही की वृद्धि दर तीसरी तिमाही के आठ फीसदी के मुकाबले थोड़ी कम रही।
इससे पहले शुक्रवार को अपनी दोमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने जीडीपी के अनुमान जारी किए थे। इसके मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। अगले साल यह 1.10 फीसदी घट कर 6.6% पर आ सकती है। अर्थव्यवस्था के प्रमुख सेक्टर्स का विकास दिखाने वाली ग्रॉस वैल्यू ऐडेड यानी जीवीए की विकास पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.9 फीसदी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि इस बार सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे साल के जीडीपी आंकड़ों को एक नए बदलाव के साथ पेश किया है। इस बार का आंकड़ा नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर तैयार किया गया है।
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