अब नया पैमाना
अगले वित्त वर्ष से सरकार जीडीपी की तुलना में ऋण के अनुपात को राजकोषीय सेहत मापने का आधार पर बनाने जा रही है। परिणाम यह होगा कि सरकार की आमदनी एवं खर्च के बीच अनुशासन की बात महत्त्वपूर्ण नहीं रह जाएगी। अगले वित्त वर्ष से सरकार की वित्तीय सेहत को मापने का पैमाना बदल जाएगा। अभी तक ये पैमाना राजकोषीय घाटा है। मगर वित्त वर्ष 2026-27 से केंद्र जीडीपी की तुलना में कर्ज के अनुपात के आधार पर वित्तीय सेहत की जानकारी देगी। संभवतः इस वित्त वर्ष में जीडीपी की तुलना में कर्ज का अनुपात 55 फीसदी रहेगा, जबकि अनुमान...