नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं का दमन किया गया, अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया।
आपातकाल की वर्षगांठ पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारतीय इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक था। उन्होंने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने उस समय लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति देश की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराते हुए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि “संविधान हत्या दिवस” देश को उस दौर की याद दिलाता है, जब लोकतंत्र को बुरी तरह कुचला गया था। उन्होंने कहा कि यह दिन संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के संकल्प को और मजबूत करता है।
भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू रहा था। केंद्र सरकार वर्ष 2025 से 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मना रही है। राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, आपातकाल के दौरान सत्ता के दुरुपयोग और नागरिकों पर हुए अत्याचारों की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है।


