नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते के आखिरी कामकाजी दिन यानी शुक्रवार को विमानन कंपनी इंडिगो की मनमानी का मुद्दा उठा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया में एक पोस्ट करके लिखा, ‘इंडिगो की विफलता इस सरकार के मोनोपोली मॉडल की कीमत है’। गौरतलब है कि पायलट और चालक दल की कमी के कारण शुक्रवार को इंडिगो की एक हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द हो गईं।
राज्यसभा में विपक्ष ने इस मुद्दे पर केंद्र से जवाब मांगा। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नागरिक विमानन मंत्री राम मोहन नायडू हालात की समीक्षा कर रहे हैं। केंद्र इंडिगो की क्या मदद कर सकता है, इसका आकलन किया जा रहा है। कांग्रेस सासंद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में कहा कि इंडिगो की समस्या सरकार के मोनोपोली मॉडल के कारण हुई है। सरकार ने देश की ज्यादातर चीजें चंद लोगों के हाथ में दे दी है। यह सही नहीं है। यह अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र और देश के लिए अच्छा नहीं है।
उधर लोकसभा में हाई कोर्ट के एक जज को ‘आरएसएस जज’ कहे जाने पर विवाद हो गया। इसे लेकर शुक्रवार को डीएमके सांसद टीआर बालू और किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस हुई। बालू ने एक मुद्दे पर बोलते हुए एक हाई कोर्ट के जज को ‘आरएसएस जज’ कह दिया। किरेन रिजिजू ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, ‘आप एक जज को आरएसएस का जज कैसे कह सकते हैं। यह संसद की मर्यादा का उल्लंघन है। आप एक जज के लिए असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते। आप माफी मांगिए। न्यायपालिका पर कलंक लगाने की आपकी हिम्मत कैसे हुई’।
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