नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सारे जतन करने के बावजूद अमेरिका के लोगों ने उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बुरी तरह से हरा दिया है। मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट में अपना बहुमत गंवा दिया है। डमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बना लिया है। अब राष्ट्रपति के रूप में बचे हुए दो साल के कार्यकाल में ट्रंप को डेमोक्रेटस के सहारे कामकाज करना होगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने नतीजों की घोषणा शुरू होने के तुरंत बाद हार स्वीकार कर ली थी और कहा था कि वे डेमोक्रेट्स के साथ मिल कर काम करने को तैयार हैं। हालांकि साथ ही यह भी कह दिया कि बैलेट पर उनका नाम या तस्वीर नहीं थी अन्यथा उनकी पार्टी जीत जाती। उनका कहना था कि अगर राष्ट्रपति का चुनाव होता और उनका नाम होता तो जीत मिल जाती।
बहरहाल, ईरान सहित सात देशों में युद्ध का मोर्चा खोल कर ट्रंप ने अपने मेक अमेरिका ग्रेट अगेन यानी मागा सपोर्ट बेस को नाराज कर दिया था। ऊपर से बढ़ती महंगाई और ट्रंप परिवार पर लगे आरोपों की वजह से भी उनके खिलाफ नाराजगी थी। तभी अमेरिका के मतदाताओं ने ट्रंप की पार्टी को निर्णायक रूप से पराजित किया है।
अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की कुल 435 सीटों में से गिनती पूरी होने से पहले ही डेमोक्रेटिक पार्टी ने 228 सीटें जीत कर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया। बुधवार की देर शाम तक ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने सिर्फ 139 सीटें जीती थीं। ऐसी ही कांग्रेस के ऊपरी सदन यानी सीनेट की एक सौ सीटों में से 35 पर चुनाव हुए थे, जिनमें से देर शाम तक 33 सीटों के नतीजे सामने आ चुके थे। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। इस नतीजे के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हो गईं। पहले ट्रंप की पार्टी के पास 53 सीटें थीं।
अमेरिका के 36 राज्यों में गवर्नर के चुनाव भी हुए थी, जिनमें से देर शाम तक 34 के नतीजे आ गए थे। इनमें से 22 राज्यों में डेमोक्रेट्स जीते हैं और ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को सिर्फ 12 राज्यों में जीत मिली है। इससे दिख रहा है कि ट्रंप की पार्टी के मुकाबले दोगुने राज्यों में उनकी विरोधी पार्टी जीती है। ट्रंप की पार्टी कई ऐसे राज्यों में भी हारी है, जिन्हें रिपब्लिकन पार्टी का पुराना गढ़ माना जाता था। भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी भी चुनाव हार गए हैं।
ट्रंप के लिए निजी तौर पर सबसे ज्यादा झटका देने वाला नतीजा मिशिगन से आया, जहां से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद ने जीत हासिल की। वे अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। ट्रंप ने अब्दुल को खुले मंच से ‘जिहादी’ कहा था। 25 अक्टूबर को मिशिगन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा था, ‘मैं यहां एक जिहादी और मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य को अमेरिकी सीनेटर बनने से रोकने आया हूं’। ट्रंप ने यहां तक कहा था कि अगर अल सैयद सीनेटर बनते हैं, तो उन्हें संसद में जाने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए।
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