ईरान ने अमेरिका के साथ एक और अस्थायी संघर्ष विराम के प्रस्ताव को खारिज करते हुए युद्ध के ‘स्थायी अंत’ की मांग की है। गल्फ न्यूज ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट की है कि 60 दिनों के अंतरिम समझौते की समय सीमा समाप्त होने के बाद कूटनीतिक प्रयास ठप पड़े हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के 17 जून को हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता पत्र (एमओयू) में सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने और अंतिम समझौते के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम एवं प्रतिबंधों जैसे प्रमुख मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिनों की अवधि तय की गयी थी।
बिना किसी सफलता या समय सीमा बढ़ाये ही 17 अगस्त को यह अवधि समाप्त हो गयी, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस समझौते को ‘युद्ध का अंत, न कि संघर्ष विराम’ करार दिया है और कहा कि ईरान को अभी यह तय करना है कि सीधी बातचीत फिर से शुरू की जाये या नहीं। वहीं ईरानी संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा, जब तक कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटा लेता, तेल प्रतिबंध नहीं हटाता, फ्रीज की गयी ईरानी संपत्तियों को जारी नहीं करता और अपनी सैन्य धमकियों को समाप्त नहीं करता।
उन्होंने अमेरिकी दबाव बढ़ाकर ईरान को एमओयू में शामिल शर्तों से इतर शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की संभावना को भी खारिज कर दिया। ‘एक्स’ पोस्ट में श्री गलीबाफ ने कहा, “ऐसा लगता है कि अमेरिका यह मान रहा है कि ईरान पर अधिक दबाव डालने से ऐसी रियायतें मिलेंगी, जो कभी समझौते का हिस्सा ही नहीं थीं।”
उन्होंने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा, “दोनों अधिकारी अपनी सीमाओं से बाहर काम कर रहे हैं। श्री गलीबाफ ने कहा, “इस जोकर मंडली से अपनी टोपी से खरगोश निकालने और आपके फैलाये कचरे साफ करने की उम्मीद छोड़ दें। इस बीच श्री ट्रंप ने मंगलवार को कहा, “ईरान के साथ कोई बातचीत या चर्चा नहीं चल रही है और न ही कोई तय है।
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उन्होंने दोहराया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी लागू है और होर्मुज जलडमरूमध्य ‘खुला’ है, जो ईरान के दावे का सीधा खंडन करता है। यह अंतरिम समझौता हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद ही टूटने लगा था। अमेरिका ने ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) पर ओमान के समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों का आरोप लगाया, जिसके बाद श्री ट्रंप ने जुलाई की शुरुआत में ही इस समझौते को ‘समाप्त’ घोषित कर दिया था। इसके कुछ ही दिनों बाद ईरान ने भी इस व्यवस्था पर रोक लगा दी थी।
तब से रुक-रुक कर हमले जारी है। होर्मुज एवं बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में हालांकि जहाजों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम उछल गये हैं और प्रमुख टैंकर कंपनियों को इन दोनों समुद्री रास्तों से हटने पर मजबूर होना पड़ा है।
दोनों देशों के अड़ियल रुख के कारण कूटनीति की गुंजाइश लगभग खत्म हो गयी है। ईरान अब किसी भी अस्थायी विराम के पक्ष में नहीं है, क्योंकि उसका मानना है कि इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों को दोबारा संगठित होने का मौका मिल जायेगा। दूसरी तरफ, अमेरिका किसी भी स्थायी समझौते से पहले कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और नाकेबंदी के जरिये अपना पलड़ा भारी करना चाहता है।
ट्रंप प्रशासन के हालिया सार्वजनिक संदेशों में ईरान पर ‘अधिकतम दबाव’ पर जोर देना जारी रखा गया है, जिसमें प्रतिबंध ईरान पर वित्तीय और रणनीतिक दबाव बनाने का मुख्य साधन बने हुए हैं। इस गतिरोध का वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र पर गंभीर परिणाम पड़ रहा है, जहां बुधवार तड़के ब्रेंट क्रूड 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो लगभग एक महीने में इसका उच्चतम स्तर है।
Pic Credit : ANI
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