विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को कहा कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआर कांगो) में इबोला से 2,325 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे यह देश में अब तक दर्ज किया गया इबोला का सबसे घातक प्रकोप बन गया है।
संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने जो सरकारी आंकड़ा पेश किया है उसके अनुसार, इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़े इस प्रकोप में 2018-2020 की महामारी की तुलना में 26 अधिक लोगों की जान चली गयी है।
प्रकोप के केंद्र बिंदु बुनिया से वीडियो लिंक के जरिए जेनेवा में संवाददाताओं से बात करते हुए डब्ल्यूएचओ के इंसीडेंट मैनेजर थिएर्नो बाल्डे ने बताया कि 5,000 से अधिक पुष्ट मामले सामने आये हैं, जिनमें मृत्यु दर 46 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। बास-उएले प्रांत में भी मामले सामने आये हैं, जिससे प्रभावित प्रांतों की कुल संख्या छह हो गयी है।
श्री बाल्डे ने कहा, “स्थिति काफी कठिन है, लेकिन लोग इस प्रकोप को नियंत्रित करने के प्रयास में दिन-रात काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि प्रतिक्रिया टीमों को “लगभग दैनिक आधार पर” स्थानीय समुदायों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है और सोमवार को राहत कार्य में लगी एक एम्बुलेंस पर हमला भी किया गया।
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श्री बाल्डे ने गांवों में पहले से ही अंतिम संस्कार करने वाले लोगों को क्लोरीन और दस्ताने सहित सुरक्षात्मक उपकरणों से लैस कर और प्रशिक्षण देकर सुरक्षित तथा सम्मानजनक दफन प्रथाओं का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लीटा और निज़ी सहित अन्य क्षेत्रों में स्थिति स्थिर हुई है, जहां छह से सात सप्ताह पहले सामुदायिक मौतों के कारण प्रतिक्रिया टीमें असमर्थ महसूस कर रही थीं। उन्होंने कहा, “आज हम केवल कुछ ही मामलों और मौतों की सूचना दे रहे हैं तथा उन शवों को सही समय पर सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से दफनाया जा रहा है।”
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने 15 मई को बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप की घोषणा की थी। वर्तमान में विशेष रूप से इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। इस प्रकोप को पहले ही अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जा चुका है।
Pic Credit : ANI
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